4 august 2026 ;
देश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक ओर जहां कई संस्थान बंद हुए हैं, वहीं दूसरी ओर इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन अप्रूवल वर्षों के दौरान AICTE से मान्यता प्राप्त कुल 342 तकनीकी संस्थानों ने अपना संचालन बंद कर दिया है।
यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में सांसद राहुल कसवां के सवाल के जवाब में दी। मंत्रालय ने बताया कि संस्थानों को बंद करने की प्रक्रिया AICTE अधिनियम, 1987 और अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक में दिए गए नियमों के अनुसार पूरी की जाती है।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक संस्थान हुए बंद
आंकड़ों के अनुसार, संस्थानों के बंद होने की संख्या हर साल बढ़ी है। वर्ष 2024-25 के अप्रूवल चक्र में 83 संस्थान बंद हुए। इसके बाद 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 124 हो गई, जबकि 2026-27 के अप्रूवल चक्र में 135 संस्थानों को बंद किया गया।
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 57 तकनीकी संस्थान बंद हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 54 और मध्य प्रदेश में 53 संस्थानों का संचालन समाप्त हुआ। तमिलनाडु में 45, गुजरात में 22, पंजाब में 19, राजस्थान में 17 और आंध्र प्रदेश में 15 संस्थान बंद हुए।
इसके अलावा तेलंगाना, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में भी कुछ तकनीकी संस्थानों के बंद होने की जानकारी सामने आई है।
संस्थान घटे लेकिन तकनीकी शिक्षा में दाखिले बढ़े
संस्थानों के बंद होने के बावजूद तकनीकी शिक्षा में छात्रों की भागीदारी कम नहीं हुई है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023-24 में तकनीकी संस्थानों में कुल नामांकन 22,11,504 था।
इसके बाद 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 27,25,980 हो गई। वहीं 2025-26 में तकनीकी पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या बढ़कर 29,58,870 तक पहुंच गई।
मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संस्थानों के बंद होने का कारण कम छात्र संख्या ही थी। साथ ही किसी विशेष संस्थान को बंद करने की वजह भी सार्वजनिक नहीं की गई। केवल इतना बताया गया कि नियमों के तहत संस्थान स्वेच्छा से बंद करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
तकनीकी संस्थानों को मजबूत बनाने के लिए AICTE के कदम
तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों की स्थिरता बनाए रखने के लिए AICTE कई सुधार लागू कर रहा है। इसके तहत कॉलेजों को कम मांग वाले पाठ्यक्रमों में सीटें घटाने या ऐसे कोर्स बंद करने की अनुमति दी गई है।
वहीं उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए और रोजगार आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी जोर दिया जा रहा है। AICTE अपने अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक में समय-समय पर बदलाव कर नियमों को आसान बना रहा है।
इसके अलावा संस्थानों में नवाचार, उद्योगों के साथ सहयोग, इंटर्नशिप और कौशल विकास को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। ऑनलाइन अप्रूवल प्रक्रिया के माध्यम से व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश भी जारी है।
तकनीकी शिक्षा में बदलाव का दौर
342 संस्थानों का बंद होना तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में बदलाव का संकेत माना जा सकता है। जहां कुछ संस्थान चुनौतियों के कारण बंद हो रहे हैं, वहीं छात्रों की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि गुणवत्तापूर्ण और रोजगार से जुड़े तकनीकी पाठ्यक्रमों की मांग अभी भी बनी हुई है।

