15 August 2026 ; Dehradun।
देहरादून। सुबह की पहली किरण जब हिमालय की चोटियों को छूती है, तो देवभूमि उत्तराखंड की फिजाओं में आज कुछ अलग ही रंग नजर आता है। पहाड़ों की शांत वादियों से लेकर राजधानी देहरादून की सड़कों तक तिरंगा शान से लहरा रहा है। स्कूलों में बच्चे हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए खड़े हैं, बाजार देशभक्ति के रंग में सजे हैं और हर तरफ एक ही स्वर सुनाई दे रहा है—भारत माता की जय।
आज पूरा देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और उत्तराखंड भी इस राष्ट्रीय पर्व को पूरे गौरव और उत्साह के साथ मना रहा है। राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में राज्य स्तरीय मुख्य समारोह आयोजित किया जा रहा है, जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ध्वजारोहण करेंगे। समारोह में देश और प्रदेश के लिए उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा।
लेकिन उत्तराखंड के लिए 15 अगस्त केवल एक पर्व नहीं है। यह वह दिन है जब पहाड़ अपने उन वीर सपूतों को भी याद करता है, जिन्होंने तिरंगे की आन के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उत्तराखंड की पहचान देश की सैन्य परंपरा से गहराई से जुड़ी रही है। यहां के गांवों में शायद ही कोई ऐसा इलाका हो, जहां किसी परिवार का बेटा देश की सीमाओं पर सेवा न कर रहा हो।
तिरंगे के नीचे याद आते हैं वे चेहरे
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का शहीद अमित कुमार अणथ्वाल के परिवार से मिलना भी इसी भावना को सामने लाता है। मुख्यमंत्री ने देहरादून के भाऊवाला स्थित उनके घर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिजनों को सम्मानित किया।
शहीदों के परिवारों के लिए 15 अगस्त सिर्फ उत्सव का दिन नहीं होता। तिरंगा जब आसमान में लहराता है, तो उसके साथ उन अपनों की याद भी लौटती है, जो देश की रक्षा करते हुए हमेशा के लिए अमर हो गए। यही वह भाव है जो स्वतंत्रता दिवस को महज एक सरकारी कार्यक्रम से आगे ले जाकर राष्ट्र के सामूहिक गौरव का पर्व बनाता है।
देवभूमि से देश के नाम एक संदेश
आज उत्तराखंड के पहाड़ों से लेकर मैदानों तक एक ही संदेश गूंज रहा है—आजादी हमें विरासत में मिली है, लेकिन इसकी रक्षा और देश को मजबूत बनाना हमारी जिम्मेदारी है।
कहीं बच्चे तिरंगा लेकर प्रभात फेरी निकाल रहे हैं, कहीं युवा देशभक्ति के गीत गा रहे हैं और कहीं बुजुर्ग स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां नई पीढ़ी को सुना रहे हैं। पौड़ी से लेकर पिथौरागढ़ और चमोली से लेकर हरिद्वार तक, उत्तराखंड का हर क्षेत्र अपने तरीके से राष्ट्र के इस महापर्व में शामिल हो रहा है। हाल के दिनों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तिरंगा यात्राएं और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान भी इसी राष्ट्रभावना को मजबूत कर रहे हैं।
यह वही उत्तराखंड है, जहां पहाड़ की कठिन जिंदगी के बीच पला-बढ़ा युवा देश की सीमाओं पर जाकर खड़ा होता है। जहां मां अपने बेटे को वर्दी पहनाकर गर्व महसूस करती है और पिता तिरंगे में लिपटे अपने बेटे को अंतिम विदाई देते हुए भी देश पर गर्व करता है।
यही उत्तराखंड की असली तस्वीर है—हिमालय की ऊंचाई, सैनिक का हौसला और तिरंगे के प्रति अटूट सम्मान।
आज जब दिल्ली के लाल किले से लेकर उत्तराखंड के छोटे-छोटे गांवों तक तिरंगा फहरा रहा है, तो देवभूमि की वादियां भी पूरे देश से यही कह रही हैं—
“हम पहाड़ हैं, हम प्रहरी हैं… और भारत की आन-बान-शान के लिए हमेशा खड़े रहेंगे।”
जय हिंद। 🇮🇳

