18.08.2026 ; देहरादून।
देहरादून। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन बुधवार से उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे। उनके इस दौरे को राज्य के प्रमुख प्रशासनिक और प्रशिक्षण संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रवास के दौरान उपराष्ट्रपति देश की भावी प्रशासनिक और वन सेवा से जुड़े अधिकारियों से रूबरू होंगे तथा उनके प्रशिक्षण और जिम्मेदारियों से संबंधित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी का दौरा खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेगा। अकादमी में वह भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद करेंगे। देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रशिक्षण के लिए पहुंचे इन अधिकारियों को वन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा जैसी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। ऐसे में उपराष्ट्रपति के साथ संवाद उनके लिए अपने अनुभवों और विचारों को साझा करने का अवसर भी बनेगा।
वन सेवा के प्रशिक्षुओं से बातचीत के दौरान बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। वन क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी, जैव विविधता के संरक्षण और विकास तथा पर्यावरण के बीच संतुलन जैसे विषय भी इस तरह के संवाद के केंद्र में रह सकते हैं। हालांकि, कार्यक्रम में उठाए जाने वाले विषयों की विस्तृत आधिकारिक जानकारी अलग से सामने आना बाकी है।
इसके बाद उपराष्ट्रपति मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वह आईएएस प्रोफेशनल कोर्स के समापन समारोह को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर प्रशिक्षण पूरा कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों के सामने लोकसेवा की भूमिका और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखने का अवसर उपराष्ट्रपति को मिलेगा।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे। ऐसे में अकादमी में होने वाला समापन समारोह उनके पेशेवर जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव का हिस्सा होगा। उपराष्ट्रपति का संबोधन उन्हें संवैधानिक मूल्यों, जनसेवा और प्रशासनिक दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देने वाला हो सकता है।
उत्तराखंड में स्थित दोनों संस्थान देश के महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल हैं। देहरादून की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को प्रशिक्षण देती है, जबकि मसूरी की लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी सिविल सेवकों के प्रशिक्षण के लिए जानी जाती है। इस वजह से उपराष्ट्रपति का दोनों संस्थानों में पहुंचना उनके दौरे को विशेष महत्व देता है।
दो दिवसीय प्रवास के दौरान उपराष्ट्रपति के कार्यक्रमों को देखते हुए संबंधित संस्थानों और प्रशासन की ओर से आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। उनके दौरे से प्रशिक्षु अधिकारियों को देश के संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के विचार सुनने और उनसे सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा।
उपराष्ट्रपति का यह उत्तराखंड दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशिक्षण ले रहे उन अधिकारियों के लिए भी अहम होगा, जो आने वाले समय में वन संरक्षण और देश के प्रशासनिक तंत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले हैं। उनके साथ होने वाला संवाद भावी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों को व्यापक दृष्टिकोण से समझने में मदद कर सकता है।

