देहरादून ; 22.08.2026,
देहरादून। उत्तराखण्ड अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक व्यवस्था तैयार करने पर लगातार काम कर रही है, जिससे देश-विदेश के निवेशकों को बेहतर माहौल मिले और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलें।
मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान उत्तराखण्ड को 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इनमें से करीब एक लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ चुका है। सरकार का जोर अब केवल निवेश प्रस्ताव हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक परियोजनाओं में बदलने और उनसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने पर है।
30 से अधिक नीतियों से निवेशकों को सहूलियत
राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए 30 से अधिक नई नीतियां लागू की गई हैं। सरकार का प्रयास है कि कारोबार शुरू करने और विस्तार करने वाले उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं का सामना न करना पड़े। सिंगल विंडो व्यवस्था और निवेश-अनुकूल नीतियों के जरिए उद्योगों के लिए कारोबारी वातावरण को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
इसका असर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। पंतनगर, रुद्रपुर, सितारगंज, काशीपुर, सेलाकुई और हरिद्वार जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार देने के साथ नई परियोजनाओं के लिए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
खुरपिया बनेगा औद्योगिक विकास का अहम केंद्र
उधमसिंह नगर में विकसित किया जा रहा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC), खुरपिया भी सरकार की औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री धामी ने हाल में इसकी प्रगति की समीक्षा करते हुए इसे निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई।
सरकार के मुताबिक परियोजना के समयबद्ध विकास के साथ स्थानीय युवाओं को कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य के समन्वय से खुरपिया को आधुनिक एवं निवेश-अनुकूल औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उद्योगों के साथ युवाओं के भविष्य पर भी नजर
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि औद्योगिक निवेश का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब इसका असर प्रदेश के युवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे। इसी सोच के तहत सरकार निवेश परियोजनाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने पर जोर दे रही है।
औद्योगिक विस्तार से उत्पादन और कारोबार बढ़ने के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सेवा क्षेत्र, छोटे कारोबार और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे पहाड़ और मैदानी क्षेत्रों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से जोड़ने का अवसर भी पैदा होगा।
उत्तराखण्ड को निवेश के भरोसेमंद केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य
सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य उत्तराखण्ड को ऐसा राज्य बनाना है जहां उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक आधारभूत ढांचा, कुशल मानव संसाधन और अनुकूल नीतियां एक साथ उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक विकास को राज्य की व्यापक आर्थिक प्रगति से जोड़ा जा रहा है।
इस दिशा में निवेश को जमीन पर उतारने, नई औद्योगिक परियोजनाओं को गति देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर लगातार निगरानी की जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड पर्यटन और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ विनिर्माण, एमएसएमई और आधुनिक उद्योगों के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत जगह बनाएगा।
कुल मिलाकर, उत्तराखण्ड में औद्योगिक विकास की मौजूदा रणनीति निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ उसे स्थानीय रोजगार, कौशल और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर केंद्रित नजर आ रही है। सरकार की कोशिश है कि राज्य में आने वाला निवेश केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका लाभ जमीन पर उद्योग, रोजगार और क्षेत्रीय विकास के रूप में दिखाई दे।

