12 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। उत्तराखंड ने साक्षरता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ का दर्जा प्राप्त किया है। राज्य को यह उपलब्धि 8 जुलाई 2026 को मिली। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड की जनता को बधाई देते हुए इसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था और जनभागीदारी की बड़ी सफलता बताया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे अपने संदेश में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का यह मुकाम केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासन, शिक्षा विभाग, शिक्षक, स्वयंसेवक और आम नागरिकों की साझा भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करना अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण है।
वयस्क शिक्षा को मिला नया आधार
केंद्रीय मंत्री ने ‘उल्लास’ कार्यक्रम की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उन वयस्कों तक शिक्षा पहुंचाना है, जो किसी कारणवश औपचारिक स्कूली शिक्षा से जुड़ नहीं पाए। कार्यक्रम के माध्यम से आधारभूत पढ़ने-लिखने की क्षमता के साथ-साथ जीवन कौशल और डिजिटल दक्षता विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा जहां बच्चों की प्रारंभिक अवस्था से लेकर कक्षा 12 तक शिक्षा की पहुंच, गुणवत्ता और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में काम करती है, वहीं ‘उल्लास’ वयस्क शिक्षार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
शिक्षा के साथ डिजिटल साक्षरता पर भी फोकस
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य सरकार के साथ शिक्षा विभाग, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और प्रदेशवासियों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं है। इसके आगे प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल ज्ञान और निरंतर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे शिक्षा को रोजगार, जीवन कौशल और बदलती तकनीक की जरूरतों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
अन्य राज्यों के लिए बनेगा उदाहरण
प्रह्लाद जोशी ने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड की यह सफलता देश के दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी साक्षरता अभियान को नई गति देने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि सतत शिक्षा, जीवन कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से नव-साक्षरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे भी प्रयास जारी रहने चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप शिक्षा को अधिक समावेशी और समानतापूर्ण बनाने में उत्तराखंड की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उत्तराखंड सरकार की ओर से भी संकेत दिया गया है कि पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि के बाद अब जोर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और आजीवन सीखने की व्यवस्था को मजबूत करने पर रहेगा।
इस तरह उत्तराखंड की ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ की उपलब्धि को केवल एक आंकड़े के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा से वंचित लोगों को अवसरों से जोड़ने और समाज के व्यापक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

