5 july 2026, Dehradun !
उत्तराखंड में विद्युत लोकपाल ने हाल ही में दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं, जिनका सीधा असर उपभोक्ताओं और बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े नियमों पर पड़ता है। इन फैसलों में एक ओर किरायेदारों के बिजली कनेक्शन के अधिकारों को स्पष्ट किया गया है, वहीं दूसरी ओर रूफटॉप सोलर पावर सिस्टम की जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति साफ की गई है।
किरायेदार को बिजली कनेक्शन देने पर बड़ा फैसला
हरिद्वार की आशा अग्रवाल से जुड़े मामले में विद्युत लोकपाल ने साफ किया कि यदि कोई व्यक्ति किसी परिसर में वास्तविक रूप से रह रहा है और उसके कब्जे को अदालत ने सुरक्षित रखा है, तो उसे बिजली कनेक्शन से वंचित नहीं किया जा सकता।
यूपीसीएल (उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने यह कहते हुए नया कनेक्शन देने से इनकार कर दिया था कि संबंधित संपत्ति को लेकर ट्रस्ट के साथ विवाद अदालत में लंबित है और किरायेदारी समझौता समाप्त हो चुका है। लेकिन लोकपाल ने माना कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 43 और 44 के तहत वास्तविक कब्जेदार को बिजली पाने का अधिकार है।
आदेश में यह भी कहा गया कि चूंकि अदालत ने बेदखली पर रोक लगाई हुई है, इसलिए आवेदक अभी भी वैध कब्जेदार हैं। ऐसे में यूपीसीएल को निर्देश दिया गया कि आवश्यक दस्तावेजों की कमी की स्थिति में तीन गुना सुरक्षा राशि लेकर 15 दिनों के भीतर बिजली कनेक्शन जारी किया जाए।
रूफटॉप सोलर सिस्टम की जिम्मेदारी उपभोक्ता पर
दूसरे मामले में टिहरी गढ़वाल के एक उपभोक्ता की याचिका को लोकपाल ने खारिज कर दिया। उपभोक्ता ने आरोप लगाया था कि उनके घर पर लगे 3 किलोवाट के ग्रिड-इंटरकनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम में खराबी और इन्वर्टर फेल होने के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे उन्हें अधिक बिजली बिल भरना पड़ा।
उन्होंने इसके लिए यूपीसीएल को जिम्मेदार ठहराते हुए बिल माफी या कंपनी से वसूली की मांग की थी। लेकिन लोकपाल ने स्पष्ट किया कि यूपीसीएल केवल ग्रिड कनेक्शन तक जिम्मेदार है, जबकि सोलर पैनल की कार्यप्रणाली, रखरखाव और तकनीकी खराबी की जिम्मेदारी उपभोक्ता और इंस्टॉलेशन कंपनी की होती है।
समझौते के नियमों का हवाला देते हुए कहा गया कि इंटरकनेक्शन प्वाइंट के बाद सिस्टम के संचालन और मरम्मत का दायित्व यूपीसीएल पर नहीं आता। इसलिए उपभोक्ता की शिकायत को अस्वीकार करते हुए उन्हें बकाया बिजली बिल चुकाने का निर्देश दिया गया।
निष्कर्ष
इन दोनों फैसलों से यह स्पष्ट हुआ है कि जहां एक तरफ किरायेदारों के वैध अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत किया गया है, वहीं दूसरी ओर सौर ऊर्जा सिस्टम की जिम्मेदारी को लेकर उपभोक्ताओं की जवाबदेही भी तय की गई है। यह निर्णय आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकते हैं।

