3 july 2026,
देहरादून। उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था, बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं, जंगलों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण लंबे समय से देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण रहा है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में राज्य में पर्यटन की परिभाषा तेजी से बदली है। अब पर्यटन केवल चारधाम यात्रा या कुछ चुनिंदा पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र को नई सोच, आधुनिक योजनाओं और स्थानीय भागीदारी के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिससे गांवों तक विकास और रोजगार के अवसर पहुंच रहे हैं।
धामी सरकार का जोर “ऑल सीजन टूरिज्म” पर है, ताकि उत्तराखंड में पूरे वर्ष पर्यटकों की आवाजाही बनी रहे। इसके लिए धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर टूरिज्म, ईको टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और बॉर्डर टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि पर्यटन का दायरा जितना व्यापक होगा, स्थानीय लोगों को उतने अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने में पंडित दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास (होमस्टे) विकास योजना अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत गांवों में रहने वाले लोग अपने घरों को होमस्टे के रूप में विकसित कर पर्यटकों को स्थानीय वातावरण में ठहरने की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में बढ़ोतरी हुई है। पर्यटक भी पहाड़ी संस्कृति, लोक परंपराओं, पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय जीवनशैली का अनुभव कर रहे हैं, जिससे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई अवसरों पर कहा है कि उत्तराखंड की वास्तविक ताकत उसके गांव, प्राकृतिक संसाधन और सांस्कृतिक विरासत हैं। इसी सोच के अनुरूप सरकार ऐसे पर्यटन मॉडल को बढ़ावा दे रही है, जिससे विकास का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक भी पहुंचे। सरकार का उद्देश्य है कि युवा अपने गांवों में ही रोजगार प्राप्त करें और बेहतर भविष्य के लिए उन्हें पलायन न करना पड़े।
इसी दिशा में “13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टिनेशन” जैसी पहल के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशेष पहचान और पर्यटन क्षमता को विकसित करने पर काम किया जा रहा है। कम प्रसिद्ध लेकिन प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाकर वहां सड़क, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, डिजिटल सुविधा और अन्य आधारभूत ढांचे का विकास किया जा रहा है। इससे पर्यटन का दबाव कुछ चुनिंदा स्थानों तक सीमित रहने के बजाय पूरे राज्य में संतुलित रूप से फैल रहा है।
पर्यटन नीति में निजी निवेश को प्रोत्साहन देने के साथ होटल, रिसॉर्ट, एडवेंचर गतिविधियों और पर्यटन संबंधी सुविधाओं के विस्तार पर भी ध्यान दिया गया है। राज्य में निवेश बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए होटल प्रबंधन, ट्रैवल एजेंसी, परिवहन, गाइड सेवा, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हुए हैं।
चारधाम यात्रा के सुचारु संचालन, यात्रा मार्गों के विकास, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी सरकार लगातार कार्य कर रही है। इससे धार्मिक पर्यटन को नई मजबूती मिली है और राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी लाभ हुआ है। इसके साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देकर वहां आर्थिक गतिविधियों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर निरंतर ध्यान दिया जाता रहा, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश के सबसे मजबूत पर्यटन आधारित राज्यों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। धामी सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यटन को ऐसा माध्यम बनाना है जो स्थानीय लोगों की आय बढ़ाए, युवाओं को रोजगार दे और पहाड़ों से पलायन जैसी चुनौती को कम करने में प्रभावी भूमिका निभाए।

