देहरादून ; 23.08.2026,
धारचूला। कैलाश मानसरोवर यात्रा के इस साल के आयोजन का अंतिम चरण भी रविवार को पूरा हो गया। यात्रा पर गया 10वां और आखिरी दल सुबह करीब 9:20 बजे तिब्बत से भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया। अंतिम जत्थे के भारत लौटने के साथ ही इस वर्ष आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा का पूरा कार्यक्रम संपन्न हो गया। सीमा पार से लौटे श्रद्धालुओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत धारचूला स्थित आधार शिविर की ओर लाया जा रहा है।
भारत पहुंचने के बाद यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। इसके अलावा यात्रा से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी कराई जा रही हैं। लंबी और कठिन पर्वतीय यात्रा के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षित वापसी को प्रशासन के लिए भी अहम माना जा रहा है।
10 दलों ने पूरा किया यात्रा का कार्यक्रम
इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा अलग-अलग जत्थों में आयोजित की गई। अंतिम दल की वापसी के साथ सभी निर्धारित दल भारत लौट चुके हैं। ऊंचाई वाले दुर्गम इलाके, बदलता मौसम और कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच यात्रा को सुचारु बनाए रखना प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहा।
अंतिम दल के लौटने के बाद अब यात्रियों की वापसी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान यात्रियों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
भूस्खलन से थम गई थी लिपुलेख सड़क
यात्रा के बीच धारचूला-तवाघाट-लिपुलेख मार्ग पर भी प्राकृतिक बाधा सामने आई थी। कूलागाड़ और मलघटिया के आसपास पहाड़ी से भारी मलबा आने के कारण सड़क पर आवाजाही प्रभावित हो गई थी। भूस्खलन के बाद मार्ग बंद होने से चीन सीमा की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण सड़क संपर्क कुछ समय के लिए बाधित रहा।
सड़क विभाग और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई के बाद रास्ते से मलबा हटाया गया और मार्ग को दोबारा यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके साथ ही लिपुलेख और चीन सीमा क्षेत्र की ओर सड़क संपर्क फिर बहाल हो गया है।
सेना और स्थानीय लोगों को भी राहत
लिपुलेख मार्ग के खुलने का महत्व केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं है। यह सड़क सीमावर्ती इलाकों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मार्ग बहाल होने के बाद भारतीय सेना, स्थानीय ग्रामीणों और सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े लोगों की आवाजाही को राहत मिली है।
सड़क खुलने से आवश्यक सामान की आवाजाही और क्षेत्र में सामान्य गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि पहाड़ी इलाकों में सड़क की स्थिति मौसम पर काफी निर्भर करती है, इसलिए मार्ग पर निगरानी जारी रखी जा रही है।
फिलहाल मौसम साफ, लेकिन निगरानी जारी
सीमा क्षेत्र में इस समय मौसम साफ रहने से सड़क यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। इसके बावजूद पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है और संवेदनशील स्थानों पर दोबारा मलबा आने की संभावना बनी रहती है। इसी को देखते हुए प्रशासन सड़क की स्थिति और मौसम पर लगातार नजर रख रहा है।
विशेष रूप से उन स्थानों पर सतर्कता बरती जा रही है, जहां पहले भूस्खलन या मलबा आने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। किसी भी नई बाधा की स्थिति में सड़क को जल्द से जल्द साफ कराने के लिए संबंधित विभागों को तैयार रखा जा रहा है।
यात्रा पूरी, सीमावर्ती संपर्क भी सामान्य
कैलाश मानसरोवर यात्रा के 10वें और अंतिम दल की भारत वापसी के साथ इस वर्ष की धार्मिक यात्रा औपचारिक रूप से पूरी हो गई है। दूसरी ओर, लिपुलेख मार्ग के दोबारा खुलने से चीन सीमा की ओर सड़क संपर्क भी बहाल हो गया है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्र में एक साथ दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं—यात्रा का सफल समापन और बाधित सड़क संपर्क की बहाली।
आने वाले दिनों में प्रशासन का फोकस सीमावर्ती सड़कों को सुचारु बनाए रखने और मौसम से जुड़ी संभावित चुनौतियों से निपटने पर रहेगा।

