देहरादून ; 21.08.2026,
देहरादून। तृतीय गढ़वाल राइफल्स के पूर्व सैनिकों ने बटालियन का स्थापना दिवस देशभक्ति, शौर्य और भावुक स्मृतियों के बीच मनाया। अजबपुर स्थित विरासत फार्म में आयोजित समारोह में बटालियन से जुड़े पूर्व सैनिक एक मंच पर जुटे। वर्षों बाद साथ मिले सैनिक साथियों के बीच पुरानी यादें ताजा हुईं तो माहौल में सैन्य जीवन के अनुशासन, जज्बे और देशसेवा की भावना साफ नजर आई।
20 अगस्त 1916 को लैंसडौन से शुरू हुई तृतीय गढ़वाल राइफल्स की गौरवशाली यात्रा अब 111वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। एक सदी से अधिक लंबे इस सफर में बटालियन ने वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की अनेक मिसालें कायम की हैं। स्थापना दिवस के मौके पर पूर्व सैनिकों ने इसी गौरवशाली विरासत को याद करते हुए कहा कि वर्दी भले ही उतर गई हो, लेकिन देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा आज भी उनके भीतर उसी तरह कायम है।
वीर बलिदानियों को किया नमन
कार्यक्रम की शुरुआत गढ़वाली स्मारक पर माल्यार्पण से हुई। मुख्य अतिथि कर्नल विजय सिंह और पूर्व सैनिकों ने बटालियन के बलिदानी जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वीरों को याद करते हुए पूर्व सैनिकों ने उनके त्याग और अदम्य साहस को नमन किया। श्रद्धांजलि के दौरान कई पूर्व सैनिक भावुक भी नजर आए। उनके लिए यह क्षण केवल स्मरण का नहीं, बल्कि उन साथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी था, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
रणभूमि की यादों से फिर जीवंत हुआ अतीत
समारोह में पूर्व सैनिकों ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा किए। किसी ने कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाने के प्रसंग सुनाए तो किसी ने प्रशिक्षण, सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती और साथियों के साथ बिताए यादगार पलों को साझा किया। रणभूमि से जुड़े किस्सों ने समारोह में मौजूद पूर्व सैनिकों को उनके युवा दिनों की याद दिला दी।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि सेना में बिताया समय जीवन का ऐसा अध्याय है, जिसे उम्र बढ़ने के साथ भुलाया नहीं जा सकता। कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ देना, आदेश का पालन करना और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना सैन्य जीवन की सबसे बड़ी सीख रही। यही भावना आज भी उनके जीवन का हिस्सा है।
वर्दी उतरी, देशसेवा का जज्बा नहीं
समारोह की अध्यक्षता पूर्व सैनिक समिति तृतीय गढ़वाल राइफल्स के अध्यक्ष कैप्टन मदन सिंह गड़िया ने की। इस अवसर पर पूर्व सैनिकों ने कहा कि सेना से सेवानिवृत्ति के बाद जिम्मेदारियां जरूर बदल जाती हैं, लेकिन देश के प्रति सम्मान और समर्पण कभी कम नहीं होता। तिरंगे के प्रति सम्मान, वीर जवानों की याद और आने वाली पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करने की भावना आज भी उतनी ही मजबूत है।
मुख्य अतिथि कर्नल विजय सिंह ने भी बटालियन की गौरवशाली परंपराओं को याद किया। उन्होंने पूर्व सैनिकों के योगदान और उनके अनुभवों को सैन्य विरासत की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। कार्यक्रम में यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि किसी सैनिक की असली पहचान केवल उसकी वर्दी से नहीं, बल्कि उसके भीतर मौजूद कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम की भावना से होती है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनीं सैनिकों की गाथाएं
स्थापना दिवस समारोह में साझा की गई वीरता और सेवाभाव की कहानियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। पूर्व सैनिकों ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के भीतर राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना भी जरूरी है।
समारोह के अंत में पूर्व सैनिकों ने बटालियन की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने, वीर बलिदानियों की स्मृति को जीवित रखने और युवाओं में देशसेवा की भावना मजबूत करने का संकल्प लिया। स्थापना दिवस ने एक बार फिर साबित किया कि तृतीय गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों के लिए वर्दी भले ही बदल जाए, लेकिन मातृभूमि के प्रति समर्पण और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा कभी खत्म नहीं होता।

