देहरादून ; 2 नवम्बर 2026,
सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के साथ वर्ष 2047 तक उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को 28 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य, परिवारों को मिलेगी विशिष्ट डिजिटल पहचान
देहरादून। उत्तराखण्ड में सुशासन को तकनीक से जोड़ने और राज्य के भविष्य के विकास की रूपरेखा तैयार करने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ किया और ‘विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047’ दस्तावेज का विमोचन किया। इन दोनों पहलों के माध्यम से जहां सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने की व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने पर जोर दिया गया है, वहीं आने वाले वर्षों में प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी विकास संबंधी प्राथमिकताओं को भी निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की सार्थकता तभी है, जब सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंद और पात्र लोगों को मिले। कई बार योजनाओं की जानकारी नहीं होने के कारण लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा अलग-अलग विभागों में एक ही प्रकार के दस्तावेज बार-बार जमा करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने से नागरिकों को परेशानी होती है। देवभूमि परिवार पोर्टल के माध्यम से ऐसी समस्याओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और आम नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप बनाना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प से प्रेरणा लेकर उत्तराखण्ड सरकार भी राज्य को विकास के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है। प्रधानमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड को 21वीं सदी के तीसरे दशक का दशक बताए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य के पास पर्यटन, प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक विरासत और मानव संसाधन के रूप में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047 इन्हीं संभावनाओं को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का दस्तावेज है।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि विजन में निर्धारित लक्ष्यों को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रत्येक विभाग और जनपद अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ठोस कार्ययोजना तैयार करे। योजनाओं के लिए समयसीमा तय करने के साथ उनकी नियमित समीक्षा भी की जाए, ताकि निर्धारित परिणामों की दिशा में प्रगति का आकलन किया जा सके।
कनेक्टिविटी और धार्मिक पर्यटन पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई संपर्क सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम चल रहा है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना से आवागमन की सुविधाओं में विस्तार हो रहा है। इन परियोजनाओं का लाभ पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों के साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत धार्मिक स्थलों के विकास पर भी काम किया जा रहा है। शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित करने के माध्यम से पर्यटन गतिविधियों को पूरे वर्ष संचालित करने और स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
स्थानीय उत्पादों, महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर
मुख्यमंत्री ने औद्योगिक निवेश, स्वरोजगार और स्टार्टअप को प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की बात कही। उन्होंने बताया कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय कारीगरों, उत्पादकों और स्वयं सहायता समूहों को नए अवसर मिल सकते हैं।
महिला सशक्तीकरण के संबंध में उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
अर्थव्यवस्था और आय बढ़ाने के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना से अधिक हो चुकी है। पिछले एक वर्ष में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी और रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि को उन्होंने राज्य में हो रहे आर्थिक एवं सामाजिक बदलावों के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार इन क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आजीविका के साधन विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि लोगों को अपने गांव और क्षेत्र में ही बेहतर अवसर मिल सकें।
प्रकृति और विकास के बीच संतुलन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की पहचान हिमालय, नदियों, जंगलों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी है। इसलिए प्रदेश की विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील होने के कारण प्रत्येक परियोजना में सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने और तय समय पर योजनाओं को पूरा करने के निर्देश भी दिए।
परिवारों को मिलेगी एकीकृत डिजिटल पहचान
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने देवभूमि परिवार पोर्टल की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के परिवारों और उनके सदस्यों से संबंधित जानकारियों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। इसके अंतर्गत पंजीकरण कराने वाले प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी प्रदान की जाएगी।
इस व्यवस्था से विभिन्न सरकारी विभागों को पात्र लाभार्थियों की पहचान करने में सुविधा होगी। साथ ही विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहतर होने और योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय बढ़ने की संभावना है। नागरिकों को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार समान दस्तावेज जमा करने की परेशानी से भी राहत मिल सकेगी।
पोर्टल के प्रभावी संचालन के लिए राज्य स्तर पर देवभूमि परिवार प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला देवभूमि परिवार अधिकारी की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इस व्यवस्था के जरिए डिजिटल डेटाबेस के संचालन, समन्वय और निगरानी को व्यवस्थित करने की योजना है।
2047 तक 28 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य
प्रमुख सचिव ने विकसित उत्तराखण्ड विजन-2047 के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस दस्तावेज में लगभग 440 संकेतकों के आधार पर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए गए हैं। विजन के अनुसार वर्ष 2047 तक उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही प्रतिव्यक्ति आय को लगभग 20 लाख रुपये तक ले जाने की परिकल्पना की गई है।
दस्तावेज में बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य भी शामिल है। इसके लिए कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर जोर दिया गया है।
ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। वर्ष 2047 तक राज्य की स्थापित ऊर्जा क्षमता को लगभग 22 हजार मेगावाट तक पहुंचाने और वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। विजन में वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग पड़ाव तय किए गए हैं, ताकि विकास की प्रगति का समय-समय पर मूल्यांकन किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी से उत्तराखण्ड अपने निर्धारित विकास लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि परिवार पोर्टल से सरकारी सेवाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने और विजन-2047 से प्रदेश के दीर्घकालिक विकास को योजनाबद्ध दिशा देने में मदद मिलेगी।

