29 july 2026 ; Dehradun
देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने संकेत दिए हैं कि प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। इसके तहत प्रारंभिक शिक्षा में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए जल्द नई विज्ञप्ति जारी करने की तैयारी है, जबकि एलटी और प्रवक्ता पदों पर भी नियुक्ति प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा में 250 से अधिक सहायक अध्यापक पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है और इसे जल्द अंतिम रूप देकर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं, सहायक अध्यापक एलटी के 450 से अधिक रिक्त पदों को भरने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के खाली पदों का प्रस्ताव राज्य लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा, ताकि चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।
इसके अलावा राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता के 808 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पहले से जारी है। सरकार ने आयोग से इस प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह करने की बात कही है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति मिल सके और विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर हो।
शिक्षा विभाग ने गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति व्यवस्था में भी बदलाव का निर्णय लिया है। प्रदेश के राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों में चतुर्थ श्रेणी के 2364 रिक्त पदों पर अब आउटसोर्स एजेंसी के बजाय संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य नियुक्ति कर सकेंगे। नियुक्ति के दौरान स्थानीय निवासियों और विद्यालय के लिए भूमि दान करने वाले परिवारों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नति पर भी सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सहायक अध्यापक एलटी से प्रवक्ता पद पर लगभग तीन हजार शिक्षकों की पदोन्नति प्रस्तावित है। पदोन्नति से संबंधित सूची आयोग को भेजी जाएगी, लेकिन यदि वहां प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हुआ तो सरकार तदर्थ पदोन्नति का विकल्प अपनाकर शिक्षकों को राहत दे सकती है। पदोन्नत शिक्षकों की तैनाती उन विद्यालयों में की जाएगी, जहां शिक्षकों की सबसे अधिक आवश्यकता है।
सरकार के इन फैसलों से उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी धीरे-धीरे दूर होगी, शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लंबे समय से भर्ती एवं पदोन्नति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों और शिक्षकों को राहत मिल सकेगी।

