15 August 2026 ; Dehradun।
देहरादून। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव उत्तराखण्ड श्री आनंद बर्द्धन ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों और देश के लिए बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि आजादी केवल हमारे अधिकारों का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का भी बोध कराती है।
मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान असंख्य लोगों ने अपना जीवन देश के नाम कर दिया। उनके त्याग और संघर्ष के परिणामस्वरूप भारत आज एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि देश ने आर्थिक विकास के साथ विज्ञान, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अब आने वाली पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि इन उपलब्धियों को और आगे ले जाए।
25 साल की यात्रा से भविष्य की राह तय करने का समय
उत्तराखण्ड के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में मुख्य सचिव ने कहा कि यह समय राज्य की अब तक की यात्रा का मूल्यांकन करने और आने वाले वर्षों के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित करने का है। उन्होंने कहा कि राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में उल्लेखनीय काम किया है।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि पर्वतीय क्षेत्रों की परिस्थितियां अभी भी कई गंभीर चुनौतियां सामने रखती हैं। गांवों से पलायन रोकना, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाना, दुर्गम इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपलब्ध कराना, जल स्रोतों को बचाना और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करना राज्य की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
गांवों में रोजगार और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में उत्तराखण्ड की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। राज्य का विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें शहरों के साथ-साथ दूरस्थ पहाड़ी गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़े रहें।
उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड की पहचान केवल बड़े निर्माण कार्यों से नहीं होगी। वास्तविक विकास तब माना जाएगा जब पहाड़ का युवा अपने क्षेत्र में ही बेहतर रोजगार पा सके, महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनें, बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और आम नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो।
फाइलों से आगे परिणाम आधारित प्रशासन जरूरी
सचिवालय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यहां लिए जाने वाले फैसलों का असर सीधे प्रदेश के आम नागरिकों तक पहुंचता है। इसलिए प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए जिससे सरकारी निर्णयों का वास्तविक लाभ लोगों के जीवन में दिखाई दे।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि प्रशासन को केवल फाइलों के निस्तारण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। सरकारी कामकाज का अंतिम लक्ष्य योजनाओं का धरातल पर प्रभाव और नागरिकों को मिलने वाला परिणाम होना चाहिए। उन्होंने तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे शासन व्यवस्था को तेज, पारदर्शी, संवेदनशील और जन-केंद्रित बनाया जा सकता है।
हिमालय और पर्यावरण संरक्षण को विकास का आधार बनाने की जरूरत
मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालयी राज्य होने के कारण यहां विकास की रणनीति पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर तैयार करनी होगी। राज्य की नदियां जल के साथ-साथ यहां की संस्कृति, जीवन और अर्थव्यवस्था से जुड़ी हैं, जबकि वन जल स्रोतों, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आपदा आने के बाद राहत एवं बचाव तक सीमित रहने के बजाय जोखिम कम करने और पहले से तैयारी करने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
पर्यटन को जिम्मेदार और टिकाऊ बनाने पर बल
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है, लेकिन भविष्य में पर्यटन नीति का लक्ष्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए। राज्य को ऐसे पर्यटन मॉडल की ओर बढ़ना होगा जो स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ दे, पर्यावरण पर कम दबाव डाले और लंबे समय तक टिकाऊ बना रहे। उन्होंने जिम्मेदार, टिकाऊ और उच्च-मूल्य वाले पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
कर्तव्यनिष्ठा और जनहित को कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में मुख्य सचिव ने स्वतंत्रता दिवस को स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और संकल्प का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि आजादी का वास्तविक सम्मान तभी होगा जब हर नागरिक को विकास के समान अवसर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाएं।
उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की कि वे पारदर्शिता, ईमानदारी, नवाचार और संवेदनशीलता को अपनी कार्यशैली का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि शासन का प्रत्येक निर्णय प्रदेशहित में और प्रत्येक सरकारी प्रयास जनहित में होना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए कार्यरत सेना, अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस तथा अन्य सुरक्षा कर्मियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव, सचिव, अपर सचिव, सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारी तथा राजकीय इंटर कॉलेज के विद्यार्थी और शिक्षक उपस्थित रहे। अंत में उन्होंने सभी से मिलकर एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

