10 august 2026 ; Dehradun।
हरिद्वार। सावन के पावन अवसर पर उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या सोमवार को हरिद्वार से कांवड़ लेकर पैदल यात्रा पर रवाना हुईं। उन्होंने हर की पैड़ी पर मां गंगा का विधिवत पूजन किया और गंगाजल लेकर ऋषिकेश के वीरभद्र मंदिर के लिए प्रस्थान किया। करीब 26 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा के दौरान उनके साथ संत समाज, खेल प्रेमी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी नजर आए।
यात्रा शुरू करने से पहले रेखा आर्या ने हर की पैड़ी पर गंगा स्नान और पूजा-अर्चना कर प्रदेश व देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद संतों की मौजूदगी में उन्होंने कांवड़ उठाई और भगवान शिव के जयकारों के बीच पैदल यात्रा शुरू की। सुबह के समय शुरू हुई यात्रा में भक्ति गीतों और भोलेनाथ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
पति के साथ लिया यात्रा में हिस्सा
कांवड़ यात्रा से पहले रेखा आर्या अपने पति के साथ हरिद्वार पहुंची थीं। दोनों ने मां गंगा की पूजा की और धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज और निरंजनी अखाड़े के सचिव रामरतन गिरि से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संतों को अपनी कांवड़ यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
सोमवार को यात्रा शुरू होने के दौरान अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज और महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज सहित कई संत मौजूद रहे। संतों ने रेखा आर्या की आस्था और उनके संकल्प की सराहना की।
वीरभद्र मंदिर में करेंगी शिव का रुद्राभिषेक
हर की पैड़ी से गंगाजल लेकर पैदल निकलीं रेखा आर्या का अगला पड़ाव ऋषिकेश का वीरभद्र मंदिर है। यहां पहुंचकर वह भगवान शिव का रुद्राभिषेक करेंगी। इस यात्रा को उन्होंने धार्मिक आस्था के साथ अपने सामाजिक और खेल संबंधी संकल्पों से भी जोड़ा है।
रेखा आर्या का कहना है कि भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनके दोनों संकल्प जरूर पूरे होंगे। इस बार उनकी कांवड़ यात्रा का केंद्र देश में खेलों को नई दिशा देने और भारत की खेल क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की भावना है।
2036 ओलंपिक की मेजबानी और भारत को खेल महाशक्ति बनाने का संकल्प
रेखा आर्या ने इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान दो प्रमुख संकल्प लिए हैं। इनमें पहला संकल्प भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी दिलाने की दिशा में आगे बढ़ना है। दूसरा लक्ष्य भारत को खेलों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर की ताकत के रूप में स्थापित करना है।
उन्होंने अपनी इस धार्मिक यात्रा को युवाओं और खेलों से जोड़ने का संदेश भी दिया। उनका मानना है कि खेल केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं, बल्कि देश की प्रतिष्ठा और युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
संतों ने कहा- खेलों के जरिए राष्ट्रसेवा भी महत्वपूर्ण
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने रेखा आर्या के संकल्पों की सराहना करते हुए कहा कि खेलों के माध्यम से देश का सम्मान बढ़ाना भी राष्ट्रसेवा का एक महत्वपूर्ण रूप है। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि रेखा आर्या के दोनों संकल्प सफल हों और भारत खेल जगत में लगातार आगे बढ़े।
संतों ने उनकी कांवड़ यात्रा को धार्मिक आस्था के साथ-साथ युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करने वाला प्रयास भी बताया। उनके मुताबिक, यदि युवा खेलों से जुड़ते हैं तो इससे स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में मदद मिलेगी।
पिछले साल भी की थी 26 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा
रेखा आर्या की यह पहली पैदल कांवड़ यात्रा नहीं है। इससे पहले भी वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर करीब 26 किलोमीटर पैदल चलकर वीरभद्र मंदिर पहुंची थीं और भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। पिछले वर्ष उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संकल्प लिया था।
इस बार उन्होंने अपने संकल्पों का दायरा खेलों तक बढ़ाया है। कांवड़ यात्रा में उनके पति भी उनके साथ पैदल चल रहे हैं। इस तरह धार्मिक आस्था, सामाजिक संदेश और खेलों के प्रति जागरूकता—तीनों को जोड़ते हुए रेखा आर्या की यह यात्रा हरिद्वार से ऋषिकेश तक चर्चा का विषय बनी हुई है।

