देहरादून ; 24.08.2026,
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर में सोमवार को विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर आयोजित बैठक उस समय राजनीतिक गर्माहट का केंद्र बन गई, जब बैठक में मौजूद रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के सामने दोनों नेताओं के आमने-सामने आने से कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद भाजपा विधायक अपने समर्थकों के साथ कार्यालय के बाहर धरने पर भी बैठ गए।
SIR के मुद्दे पर बैठक में बढ़ा तनाव
रुद्रपुर में SIR प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए प्रशासनिक बैठक बुलाई गई थी। इसमें जनप्रतिनिधियों के साथ संबंधित अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक के दौरान विधायक शिव अरोरा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के बीच किसी मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आया।
देखते ही देखते सामान्य बातचीत ने तीखे विवाद का रूप ले लिया। दोनों पक्षों की ओर से तेज आवाज में बहस होने लगी और बैठक का माहौल गर्म हो गया। स्थिति ऐसी बनी कि मौजूद लोगों को बीच-बचाव करना पड़ा।
कमिश्नर के सामने बढ़ी नेताओं की तल्खी
मामला कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की मौजूदगी में हुआ। प्रत्यक्ष रूप से सामने आई जानकारी के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच कहासुनी काफी बढ़ गई थी। समर्थकों ने हस्तक्षेप कर दोनों को अलग किया, जिसके बाद स्थिति को संभाला जा सका। ताजा रिपोर्ट में भी बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस और उसके बाद भाजपा नेताओं के धरने पर बैठने की पुष्टि की गई है।
विवाद के बाद विधायक ने संभाला मोर्चा
बैठक में विवाद शांत होने के बाद भी राजनीतिक मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। विधायक शिव अरोरा अपने समर्थकों के साथ संबंधित कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के व्यवहार को लेकर विरोध जताया।
इस घटनाक्रम ने SIR जैसे प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे पर होने वाली बैठक को राजनीतिक विवाद में बदल दिया।
पहले भी दोनों नेताओं के बीच रही है राजनीतिक तल्खी
शिव अरोरा और राजकुमार ठुकराल के बीच राजनीतिक मतभेद पहले भी सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर भी देखने को मिला है। 18 अगस्त को शिव अरोरा ने ठुकराल की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी और राजनीतिक विरोध में भाषा की मर्यादा बनाए रखने की बात कही थी।
वहीं, SIR को लेकर ऊधम सिंह नगर में राजनीतिक गतिविधियां पहले से तेज हैं। हाल ही में किच्छा में भी SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे।
अब आगे क्या?
रुद्रपुर की इस घटना के बाद सवाल यह है कि SIR को लेकर चल रही प्रशासनिक कवायद के बीच राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि अपने मतभेदों को किस तरह उठाते हैं। फिलहाल बैठक में हुए विवाद के बाद धरने ने मामले को और राजनीतिक रंग दे दिया है।

