13 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। राज्य के 1,269 बिजली फीडरों को रियल टाइम मॉनीटरिंग व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। इसके जरिए ऊर्जा निगम को बिजली नेटवर्क की स्थिति की लगातार जानकारी मिल सकेगी और किसी क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित होने पर समस्या का पता लगाने तथा कार्रवाई करने में कम समय लगेगा।
देशभर में फीडरों की रियल टाइम निगरानी की बात करें तो गुजरात करीब 14 हजार फीडरों के साथ आगे है। इसके बाद उत्तराखंड का 1,269 फीडरों का आंकड़ा उल्लेखनीय माना जा रहा है। खास तौर पर पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में इस तकनीक का महत्व और बढ़ जाता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में तकनीक बनेगी मददगार
उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था मैदानी राज्यों की तुलना में कई अलग तरह की चुनौतियों से गुजरती है। यहां बिजली की लाइनें कई किलोमीटर तक दुर्गम इलाकों से होकर गुजरती हैं। घने जंगल, ऊंचे पहाड़, दूर-दराज के गांव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण किसी खराबी तक पहुंचना कई बार आसान नहीं होता।
मानसून के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। भारी बारिश, भूस्खलन और सड़क मार्ग बाधित होने से बिजली लाइनों में आई खराबी की जानकारी मिलने और मौके तक टीम पहुंचाने में समय लग सकता है। ऐसे में फीडरों से मिलने वाला रियल टाइम डेटा ऊर्जा निगम के लिए शुरुआती संकेत की तरह काम कर सकता है।
कहां हुई दिक्कत, तुरंत मिलेगी जानकारी
रियल टाइम मॉनीटरिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिजली नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा सकेगी। किसी फीडर पर असामान्य स्थिति बनने या आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी मिलने पर संबंधित क्षेत्र की पहचान पहले की तुलना में तेजी से की जा सकती है।
इससे बिजली कर्मचारियों को खराबी वाले इलाके तक पहुंचने और मरम्मत कार्य शुरू करने में मदद मिल सकती है। परिणामस्वरूप लंबे समय तक बिजली बंद रहने की समस्या को कम करने की दिशा में बेहतर काम किया जा सकेगा।
दूसरे राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड की पहल अहम
देश के कई बड़े राज्यों में अभी फीडर स्तर पर इस तरह की रियल टाइम निगरानी व्यापक रूप से शुरू नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के संदर्भ में उत्तराखंड की यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कम आबादी वाले लेकिन भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क को संभालना यहां बड़ी चुनौती है।
तकनीक के जरिए बिजली आपूर्ति की निगरानी बढ़ने से केवल खराबी पकड़ने में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि भविष्य में बिजली नेटवर्क की कार्यक्षमता का आकलन करने, कमजोर हिस्सों की पहचान करने और रखरखाव की योजना बनाने में भी सहायता मिल सकती है।
उपभोक्ताओं को मिल सकता है सीधा फायदा
फीडर की स्थिति का लगातार डेटा उपलब्ध होने से बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में समस्या का दायरा समझना आसान होगा। इससे शिकायतों के निस्तारण और फील्ड टीमों के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां बिजली नेटवर्क को लगातार प्रभावित करती हैं, रियल टाइम मॉनीटरिंग केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि आपूर्ति व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। 1,269 फीडरों को इस प्रणाली से जोड़ने के बाद इसका प्रभाव बिजली आपूर्ति की निगरानी, खराबी की पहचान और त्वरित बहाली की प्रक्रिया में दिखाई देने की उम्मीद है।

