17 july 2026 ; Dehradun!
ऋषिकेश। ऋषिकेश-देहरादून मार्ग पर स्थित सात मोड़ क्षेत्र इन दिनों सड़क निर्माण कार्य के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण से जुड़े नागरिकों ने इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आधुनिक सड़कें और बेहतर यातायात व्यवस्था जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ प्रकृति की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सात मोड़ का इलाका वर्षों से घने पेड़ों और हरियाली के लिए जाना जाता है। यहां मौजूद पेड़ न केवल राहगीरों को छाया देते हैं, बल्कि क्षेत्र के तापमान को संतुलित रखने और पक्षियों सहित अन्य जीवों के लिए प्राकृतिक आवास का भी काम करते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में पेड़ों के हटने से पर्यावरण पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यदि तकनीकी रूप से संभव हो तो सड़क की रूपरेखा में ऐसे बदलाव किए जाएं, जिनसे कम से कम पेड़ों की कटाई हो। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि जिन पेड़ों को हटाना अनिवार्य हो, उनके बदले उसी क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में नए पौधे लगाए जाएं और उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी तय की जाए।
दूसरी ओर, परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य बढ़ते यातायात के दबाव को कम करना और दुर्घटनाओं की संभावना घटाना है। उनका दावा है कि पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं और प्रतिपूरक वृक्षारोपण की व्यवस्था भी की जाएगी।
फिलहाल सात मोड़ क्षेत्र में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर बहस जारी है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि योजनाओं में पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जाए तो विकास कार्य भी आगे बढ़ सकते हैं और प्राकृतिक धरोहर भी सुरक्षित रह सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाता है।

