5 july 2026,
देहरादून। बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो लोगों का विश्वास कमजोर होगा, इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
गोदियाल ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और कथित साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान को चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि उस चढ़ावे के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता होती है, तो यह केवल आर्थिक मामला नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं की जा रही।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से मांग की कि इस मामले की जांच के लिए नेता प्रतिपक्ष की अध्यक्षता में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया जाए, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार विपक्ष की भागीदारी वाली जांच के लिए तैयार नहीं है तो किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।
गोदियाल ने यह भी मांग की कि वायरल वीडियो और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिन अधिकारियों या कर्मचारियों पर आरोप लग रहे हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। यदि जांच में उनकी संलिप्तता साबित होती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त करने का प्रयास नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे घटनाक्रम की तह तक जाकर जिम्मेदार लोगों को चिन्हित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चारों धाम देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार की आशंका देवभूमि की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए सरकार को इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए और जांच की प्रगति सार्वजनिक करनी चाहिए।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो पार्टी इसे जनहित और आस्था से जुड़ा मुद्दा बनाकर प्रदेशभर में आंदोलन करेगी। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना सरकार और मंदिर प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

