देहरादून ; 24.10.2026,
स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भेजे गए निर्देश, प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को जागरूक करने और अभिभावकों को नियमों की जानकारी देने पर जोर
मसूरी। शहर में नाबालिग छात्र-छात्राओं के दोपहिया और चारपहिया वाहन चलाने पर रोक लगाने के लिए कोतवाली पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। बच्चों की सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पुलिस एक नवंबर से विशेष अभियान शुरू करने जा रही है। इस संबंध में पुलिस ने क्षेत्र के स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजकर विद्यालय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और नाबालिग विद्यार्थियों को वाहन लेकर स्कूल आने से रोकने के निर्देश दिए हैं।
कोतवाली मसूरी के प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र सिंह गहलावत की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि थाना क्षेत्र में कई नाबालिग छात्र-छात्राएं बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के दोपहिया और चारपहिया वाहन चलाकर विद्यालय पहुंच रहे हैं। कुछ मामलों में तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कम उम्र में बिना वैध प्रशिक्षण और लाइसेंस के वाहन चलाना न केवल संबंधित बच्चों के लिए जोखिम पैदा करता है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।
प्रार्थना सभा में दी जाएगी यातायात नियमों की जानकारी
पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से कहा है कि विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित प्रयास किए जाएं। इसके तहत विद्यालयों में प्रतिदिन होने वाली प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को कम उम्र में वाहन चलाने के नुकसान, सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन करने के महत्व के बारे में बताया जाए। स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि नाबालिग विद्यार्थी अपने दोपहिया या चारपहिया वाहन लेकर विद्यालय न आएं और परिसर अथवा उसके आसपास ऐसे वाहनों की पार्किंग को प्रोत्साहित न किया जाए।
पुलिस का मानना है कि केवल कार्रवाई से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए विद्यालय प्रबंधन, अभिभावकों और विद्यार्थियों की संयुक्त जिम्मेदारी जरूरी है। यदि स्कूल स्तर पर समय रहते बच्चों को जागरूक किया जाए और अभिभावक भी नियमों का पालन सुनिश्चित करें, तो कम उम्र में वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
अभिभावकों तक भी पहुंचाई जाएगी जागरूकता
पुलिस ने प्रधानाचार्यों और स्कूल प्रबंधन को अभिभावकों को भी इस अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पत्र, व्हाट्सएप ग्रुप, सोशल मीडिया और अभिभावक-शिक्षक बैठकों का सहारा लेने को कहा गया है। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी परिस्थिति में मोटरसाइकिल, स्कूटर या कार चलाने की अनुमति न दें।
अक्सर स्कूल आने-जाने में सुविधा के लिए अभिभावक बच्चों को वाहन दे देते हैं, लेकिन कम उम्र में वाहन चलाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। ऐसे में अभिभावकों से अपेक्षा की गई है कि वे बच्चों की सुविधा के साथ उनकी सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें और उन्हें यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदार बनाएं।
अभिभावकों पर भी हो सकती है कार्रवाई
पुलिस ने अपने पत्र में संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी है कि नाबालिग के वाहन चलाते पकड़े जाने पर केवल बच्चे तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। वाहन स्वामी या अभिभावक को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। पत्र में 25 हजार रुपये तक जुर्माना, तीन वर्ष तक की सजा, वाहन का पंजीकरण निरस्त किए जाने और संबंधित नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी न किए जाने जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियान के दौरान कार्रवाई की जाएगी। इसलिए स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अभियान शुरू होने से पहले ही आवश्यक कदम उठाएं, ताकि बच्चों को वाहन लेकर विद्यालय आने से रोका जा सके।
सड़क सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र सिंह गहलावत ने स्कूल प्रबंधन से पुलिस के अभियान में सहयोग करने की अपील की है। उनका कहना है कि नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए यातायात नियमों का पालन करना और बच्चों को कम उम्र में वाहन चलाने से रोकना आवश्यक है।
एक नवंबर से प्रस्तावित इस अभियान के तहत पुलिस नियमों के उल्लंघन पर नजर रखेगी। अब देखना होगा कि विद्यालयों की जागरूकता मुहिम और पुलिस की सख्ती के बाद नाबालिगों के वाहन चलाने की समस्या पर कितना प्रभावी नियंत्रण हो पाता है।

