21 june 2026
नई दिल्ली, 21 जून। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए एक ऐसा निर्णय लिया, जिसकी व्यापक चर्चा हो रही है। कोलकाता में आयोजित योग कार्यक्रम में भाग लेने के बाद जब प्रधानमंत्री दिल्ली पहुंचे, तब उनका काफिला निर्धारित समय पर एयरपोर्ट से रवाना हो सकता था। हालांकि, उन्होंने NEET परीक्षा देने जा रहे छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए कुछ समय तक एयरपोर्ट पर ही रुकने का फैसला किया।
जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री का काफिला दोपहर करीब 1:15 बजे एयरपोर्ट से निकल सकता था। लेकिन उसी दिन दोपहर 2 बजे देशभर में NEET परीक्षा आयोजित होनी थी। प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा कारणों से कई मार्गों पर कुछ समय के लिए यातायात नियंत्रित किया जाता है। ऐसे में आशंका थी कि परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे विद्यार्थियों को ट्रैफिक संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 45 मिनट तक एयरपोर्ट पर ही प्रतीक्षा करने का निर्णय लिया। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र समय पर अपने केंद्रों तक पहुंच सकें और किसी भी तरह का दबाव या तनाव महसूस न करें।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों और यातायात अधिकारियों ने भी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। परीक्षा शुरू होने के समय के बाद ही प्रधानमंत्री का काफिला एयरपोर्ट से रवाना हुआ, जिससे सामान्य यातायात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ा।
शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में छात्रों की सुविधा को लेकर यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हर वर्ष लाखों विद्यार्थी NEET परीक्षा में शामिल होते हैं और परीक्षा के दिन समय पर केंद्र पहुंचना उनके लिए बेहद अहम होता है। ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया यह निर्णय विद्यार्थियों की जरूरतों और उनकी चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देता है।
छात्रों के हित में लिया गया फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के छोटे-छोटे निर्णय भी समाज में सकारात्मक संदेश छोड़ते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों की परीक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुछ समय इंतजार करना इसी दिशा में एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा के दौरान यातायात व्यवस्था को सहज बनाए रखने और अभ्यर्थियों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया यह कदम अब चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्रों और अभिभावकों के बीच भी इस निर्णय को सकारात्मक नजरिए से देखा जा रहा है।

