23 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल शुरू करने जा रही है। इसके तहत राज्य की 1575 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से पंचवटी वाटिकाओं का विकास किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य गांवों में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक और स्वच्छ वातावरण तैयार करना है।
इस संबंध में पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने सभी संबंधित जिला पंचायती राज अधिकारियों (डीपीआरओ) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि योजना के क्रियान्वयन में तय मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रत्येक पंचायत में विकसित होने वाली वाटिका लंबे समय तक पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी साबित हो सके।
निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 2500 वर्ग फीट भूमि पंचवटी वाटिका के लिए चिन्हित की जाएगी। भूमि चयन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में पौधों के विकास के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहे और वाटिका का संरक्षण भी आसानी से किया जा सके।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पौधारोपण वैज्ञानिक पद्धति और निर्धारित दूरी के अनुसार किया जाए। विशेष रूप से पीपल और बरगद जैसे बड़े एवं दीर्घायु वृक्षों के बीच पर्याप्त अंतर रखा जाएगा, ताकि समय के साथ उनका स्वाभाविक विस्तार हो सके और वे अधिक छाया तथा पर्यावरणीय लाभ प्रदान कर सकें।
सरकार का मानना है कि पंचवटी वाटिकाएं केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जैव विविधता को बढ़ावा देने, जलवायु संतुलन बनाए रखने और लोगों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी और जागरूकता बढ़ाने में भी यह पहल प्रभावी साबित होने की उम्मीद है।

