देहरादून ; 4 नवम्बर 2026,
देहरादून। दीपावली का त्योहार भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था का प्रमुख पर्व है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली के दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर पूरे नगर को रोशन किया था। तभी से दीपावली को दीपों का त्योहार कहा जाने लगा। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि दीपावली की रात विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली का वास होता है। वर्ष 2026 में दीपावली का पर्व रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह लगभग 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12:31 बजे तक रहेगी। देहरादून में लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ समय शाम 5:48 बजे से 7:42 बजे तक माना गया है। ऐसे में लोग घरों की साफ-सफाई, सजावट, दीप प्रज्वलन और पूजा की तैयारियों में जुटेंगे।
दीपावली जहां खुशियों और उत्साह का पर्व है, वहीं इस दौरान सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी है। विशेषकर पटाखे जलाते समय होने वाली छोटी-सी लापरवाही बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें और आतिशबाजी के दौरान हमेशा उनके साथ मौजूद रहें। पटाखे हमेशा खुले मैदान या सुरक्षित स्थान पर ही जलाएं। घरों, दुकानों, वाहनों और बिजली के तारों के आसपास आतिशबाजी करने से बचें। पटाखे जलाते समय सूती कपड़े पहनें और बच्चों को ढीले या सिंथेटिक कपड़े पहनाकर आतिशबाजी न करने दें। पटाखों को हाथ में पकड़कर जलाना, उनके ऊपर झुकना या जलने के बाद भी न फूटने वाले पटाखों को दोबारा जलाने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है। आतिशबाजी के दौरान पानी की बाल्टी और रेत अपने पास जरूर रखें। साथ ही बच्चों को पटाखों से उचित दूरी बनाए रखने की समझ भी दें।
त्योहार के दौरान आंखों और त्वचा की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि पटाखे से किसी प्रकार की चोट या जलने की घटना हो जाए तो प्रभावित स्थान पर तुरंत ठंडा बहता पानी डालें और गंभीर स्थिति में बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लें। आंख में पटाखे का कण जाने पर आंख को रगड़ने से बचें और तुरंत अस्पताल पहुंचें। इसके अलावा तेज आवाज और धुएं से बुजुर्गों, छोटे बच्चों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को बचाना भी जरूरी है। दीपावली को खुशियों के साथ मनाने के लिए पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझना भी आवश्यक है। अधिक धुआं और शोर फैलाने वाले पटाखों से दूरी बनाकर मिट्टी के दीपक, रंगोली और फूलों से घर सजाएं। त्योहार का वास्तविक आनंद अपनों के साथ खुशियां बांटने और जरूरतमंद लोगों के जीवन में भी रोशनी लाने में है। इसलिए इस दीपावली धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सुरक्षा और पर्यावरण का संकल्प लें, ताकि दीपों का यह पर्व हर घर में सुख, शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली लेकर आए।

