देहरादून ; 2 नवम्बर 2026,
देहरादून। उत्तराखंड में आर्थिक रूप से कमजोर और अकेले जीवनयापन कर रही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को अपना रोजगार या छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए अधिकतम 2 लाख रुपये तक की परियोजना स्वीकृत करने का प्रावधान है। इसमें परियोजना लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा सरकार अनुदान के रूप में देगी, जिसकी अधिकतम सीमा 1.50 लाख रुपये निर्धारित है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस योजना की जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार से जुड़कर महिलाएं अपनी आजीविका का साधन विकसित कर सकती हैं और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट के साथ एक पोस्टर भी साझा किया है। इसमें ‘निर्णय जो बने महिला सम्मान की गारंटी’ संदेश के साथ एकल महिला स्वरोजगार योजना के तहत 2 लाख रुपये तक की सहायता का उल्लेख किया गया है।
किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ?
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को आर्थिक संबल देना है, जिन्हें पारिवारिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण आजीविका चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके दायरे में निराश्रित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और अविवाहित एकल महिलाओं सहित दिव्यांग एवं एसिड अटैक से प्रभावित महिलाओं को शामिल किया गया है। पात्र ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भी योजना का लाभ देने का प्रावधान है।
सरकार देगी 75 प्रतिशत राशि, लाभार्थी को करना होगा 25 फीसदी योगदान
योजना की वित्तीय व्यवस्था के अनुसार, किसी पात्र महिला की अधिकतम 2 लाख रुपये की परियोजना में 75 प्रतिशत तक की धनराशि सरकारी अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। इस हिसाब से सरकार की ओर से अधिकतम 1.50 लाख रुपये की सहायता मिल सकती है। शेष 25 प्रतिशत राशि लाभार्थी को स्वयं के संसाधनों अथवा निर्धारित वित्तीय व्यवस्था के माध्यम से जुटानी होगी।
अनुदान की राशि तीन चरणों में जारी किए जाने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक सहायता का इस्तेमाल प्रस्तावित व्यवसाय को स्थापित करने और उसे आगे बढ़ाने में किया जाए।
स्थानीय स्तर पर रोजगार शुरू करने का मिलेगा अवसर
इस योजना के माध्यम से महिलाएं अपने निवास स्थान या आसपास के क्षेत्र में ही रोजगार की गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। छोटे व्यवसाय, सेवा आधारित कार्य, पशुपालन, कृषि से जुड़े काम और अन्य स्वरोजगार गतिविधियां महिलाओं के लिए आजीविका के विकल्प बन सकती हैं। इससे उन्हें रोजगार की तलाश में दूसरे स्थानों पर निर्भर रहने की जरूरत भी कम हो सकती है।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को नियमित आय का साधन विकसित करने और अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बनाना भी है। योजना के जरिए ऐसी महिलाओं को अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, जिन्हें परिस्थितियों के चलते आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री धामी ने योजना को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वावलंबन से जोड़ते हुए कहा है कि उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने के लिए अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। अब योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक पात्र महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचना महत्वपूर्ण होगा।

