देहरादून ; 8 नवम्बर 2026,
देहरादून। दीपों का पर्व दीपावली आते ही देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में उत्सव और उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है। रोशनी के इस पावन त्योहार को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। घरों से लेकर बाजारों तक दीपावली की रौनक दिखाई दे रही है। कहीं रंग-बिरंगी विद्युत झालरों से घरों को सजाया गया है तो कहीं मिट्टी के पारंपरिक दीपक अपनी रोशनी से खुशियों का संदेश दे रहे हैं। बाजारों में खरीदारी की चहल-पहल और घरों में पूजा-पाठ की तैयारियां इस पर्व की खूबसूरती को और बढ़ा रही हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई दीपावली के रंग में रंगा नजर आ रहा है।
दीपावली भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो केवल रोशनी और आतिशबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं, पारिवारिक परंपराओं और सामाजिक एकता से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इस दिन लोग अपने घरों को साफ-सुथरा कर सजाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना के साथ दीप प्रज्वलित करते हैं।
भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में जलाए जाते हैं दीप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली का संबंध भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने से है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या वापस लौटे थे, तब नगरवासियों ने उनके स्वागत में घी के दीप जलाकर पूरी अयोध्या को प्रकाशमय कर दिया था। इसी परंपरा को आज भी दीपावली के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। दीपावली हमें यह संदेश देती है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, सत्य, धर्म और सकारात्मकता का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा से जुड़ी हैं विशेष धार्मिक मान्यताएं
दीपावली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी धन, वैभव और समृद्धि की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला देवता माना जाता है।
इसी कारण दीपावली पर दोनों की एक साथ पूजा की जाती है। श्रद्धालु अपने घरों और प्रतिष्ठानों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति, व्यापार में उन्नति, अच्छी सेहत और खुशहाली की कामना करते हैं।
मान्यता है कि स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक है। इसी विश्वास के चलते दीपावली से पहले लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है, फूलों की मालाएं लगाई जाती हैं और दीपक जलाकर घर को प्रकाशमय किया जाता है।
दून के बाजारों में त्योहार की रौनक, खरीदारी को लेकर उत्साह
दीपावली के अवसर पर देहरादून के बाजारों में भी उत्सव की अलग ही छटा दिखाई दे रही है। मिठाइयों की दुकानों से लेकर कपड़ों, सजावटी सामान, मिट्टी के दीपकों और पूजा सामग्री की दुकानों तक लोगों की आवाजाही बनी हुई है।
लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों के लिए मिठाइयां, उपहार और सजावट का सामान खरीद रहे हैं। पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ रंग-बिरंगी मोमबत्तियां, आकर्षक लाइटें और फूलों की सजावट लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
बच्चों में नए कपड़े पहनने और त्योहार मनाने को लेकर खास उत्साह है, वहीं महिलाएं घरों को सजाने, रंगोली बनाने और पकवान तैयार करने में जुटी हुई हैं। घरों में गुजिया, मिठाइयां और विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों की तैयारियां भी त्योहार की खुशबू को और खास बना रही हैं।
देवभूमि की परंपराओं में भी दीपावली का विशेष स्थान
उत्तराखंड में दीपावली का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। देवभूमि की लोकसंस्कृति में त्योहारों का संबंध केवल व्यक्तिगत खुशियों से नहीं, बल्कि सामूहिक मेल-मिलाप और पारिवारिक एकजुटता से भी जुड़ा रहता है।
पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक लोग अपनी-अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार दीपावली मनाते हैं। कई परिवारों में कुलदेवता और ग्राम देवताओं की पूजा की परंपरा भी निभाई जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में घरों और मंदिरों में दीप जलाकर ईश्वर से परिवार तथा गांव की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
देहरादून में भी विभिन्न क्षेत्रों से आकर बसे लोग अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के साथ इस पर्व को मनाते हैं। यही विविधता शहर की दीपावली को और भी खास बनाती है।
अपनों से मिलना और खुशियां बांटना ही है दीपावली की असली पहचान
दीपावली का सबसे सुंदर पहलू यह है कि यह लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है। व्यस्त जीवनशैली के बीच यह त्योहार परिवार के साथ समय बिताने, रिश्तों में मिठास घोलने और पुराने गिले-शिकवे भुलाने का अवसर देता है।
लोग अपने रिश्तेदारों, मित्रों और पड़ोसियों को मिठाइयां देकर दीपावली की शुभकामनाएं देते हैं। वहीं जरूरतमंद लोगों के साथ खुशियां साझा करना भी इस पर्व की भावना को और सार्थक बनाता है।
आज के समय में दीपावली का एक संदेश यह भी है कि त्योहार की खुशी केवल अपने घर तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। किसी जरूरतमंद के घर में मिठाई पहुंचाना, किसी गरीब परिवार की मदद करना या किसी अकेले व्यक्ति के साथ कुछ समय बिताना भी दीपावली की सच्ची भावना को दर्शाता है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ मनाएं खुशियों का त्योहार
दीपावली की खुशियों के बीच पर्यावरण और सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। पटाखों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ा सकता है और तेज आवाज से बुजुर्गों, छोटे बच्चों तथा पशु-पक्षियों को परेशानी हो सकती है।
ऐसे में लोगों को कम प्रदूषण वाले विकल्प अपनाने, मिट्टी के दीये जलाने और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। घरों में दीपक जलाकर भी खूबसूरत और यादगार दीपावली मनाई जा सकती है।
अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है दीपोत्सव
दीपावली केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत और सकारात्मक सोच का प्रतीक भी है। जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अंधेरे को दूर करने की क्षमता रखता है, उसी तरह इंसान का एक अच्छा विचार और छोटा-सा नेक काम किसी दूसरे के जीवन में खुशियों का उजाला ला सकता है।
देहरादून में दीपावली का यह उत्सवी माहौल भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और आपसी भाईचारे की सुंदर तस्वीर पेश कर रहा है। हर घर में सुख-समृद्धि, हर चेहरे पर मुस्कान और हर दिल में नई उम्मीद जगाने वाला यह पर्व सभी के जीवन में खुशियों के नए रंग भरने की कामना लेकर आया है।
दीपों का यह प्रकाश हर घर से दुखों का अंधकार मिटाए, मां लक्ष्मी की कृपा सभी पर बनी रहे और देवभूमि उत्तराखंड सहित पूरा देश सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली से आलोकित हो।

