देहरादून ; 7 नवम्बर 2026,
देहरादून। दीपावली के पर्व पर जब हर घर रोशनी और खुशियों से जगमगा रहा था, ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन जवानों के साथ समय बिताया, जिनकी मुस्तैदी के चलते देशवासी बेफिक्र होकर त्योहार मना पाते हैं। गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सेना के जवानों के बीच पहुंचकर उनके साथ पर्व की खुशियां बांटीं। उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाई, उनका हालचाल जाना और देश के प्रति उनकी सेवाओं के लिए आभार जताया।
कार्यक्रम का माहौल औपचारिकता से अधिक पारिवारिक नजर आया। मुख्यमंत्री ने जवानों से बातचीत करते हुए कहा कि वर्दी पहनकर देश की जिम्मेदारी संभालने वाले सैनिकों का जीवन सामान्य परिस्थितियों से अलग होता है। परिवार के साथ त्योहार मनाने की इच्छा होने के बावजूद वे अपनी ड्यूटी को पहले रखते हैं। उनके लिए देश की सुरक्षा ही सबसे बड़ा दायित्व है। धामी ने कहा कि सैनिकों की इसी प्रतिबद्धता के कारण आम नागरिक अपने घरों में सुरक्षित रहकर दीपावली की खुशियां मना पाते हैं।
पिता की सीख ने जोड़ा सेना की वीर परंपराओं से
जवानों के बीच अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने निजी जीवन से जुड़ी कुछ यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि सैनिक परिवार में जन्म लेने के कारण बचपन से ही सेना के अनुशासन और देशसेवा के वातावरण को करीब से समझने का अवसर मिला। उनके पिता सेना में रहे और उन्होंने जीवन में कर्तव्य, संयम तथा राष्ट्र के प्रति निष्ठा का महत्व सिखाया।
धामी ने बताया कि बचपन में पिता से गढ़वाल रेजीमेंट के अनेक बहादुर सैनिकों की कहानियां सुनने को मिलती थीं। इनमें जसवंत सिंह रावत की वीरता का प्रसंग विशेष रूप से शामिल रहता था। वर्ष 1962 के युद्ध में नूरानांग क्षेत्र में उनके अद्वितीय साहस की कहानी आज भी भारतीय सेना के इतिहास में सम्मान के साथ याद की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उसी रेजीमेंट के जवानों के बीच खड़े होकर उन्हें अपने पिता की बातें और बचपन की स्मृतियां फिर से याद आ गईं।
उत्तराखंड की सैन्य परंपरा को बताया राज्य की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के युवाओं का सेना के प्रति आकर्षण और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा भी इस प्रदेश की बड़ी पहचान है। गढ़वाल रेजीमेंट ने अलग-अलग दौर में अपनी बहादुरी से देश का गौरव बढ़ाया है। विश्व युद्धों से लेकर आजादी के बाद के सैन्य अभियानों तक रेजीमेंट के जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी साहस का परिचय दिया।
उन्होंने शहीद जसवंत सिंह रावत सहित उन सभी वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन वीरों का योगदान इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी कहानियां आज की युवा पीढ़ी को भी देश के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देती हैं।
सैन्य अभियानों से भारत की मजबूत इच्छाशक्ति का संदेश
देश की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए धामी ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रक्षा तैयारियों और सैन्य क्षमता को नई मजबूती दी है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के जरिए देश ने अपनी सुरक्षा को लेकर दृढ़ रुख प्रदर्शित किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है और देश की रक्षा करने वाली सेना को मजबूत बनाना जरूरी है।
शहीदों के परिवारों को अब 50 लाख रुपये की सहायता
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सैनिक परिवारों के लिए राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि शहादत के बाद परिवारों को आर्थिक संबल देने के लिए अनुग्रह राशि में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां यह सहायता 10 लाख रुपये थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है।
इसके अलावा शहीद सैनिक के परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था भी लागू है। इस प्रक्रिया में परिवारों को सुविधा देने के लिए आवेदन करने की अवधि दो साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। सरकार का उद्देश्य है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के परिवारों को कठिन समय में आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
देहरादून का सैन्यधाम जल्द बनेगा वीरों की गाथाओं का केंद्र
धामी ने देहरादून में तैयार हो रहे सैन्यधाम का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इसका निर्माण लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह स्थल उत्तराखंड के उन वीर सैनिकों की स्मृति को समर्पित होगा, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन अर्पित किया। सैन्यधाम के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को सैनिकों के योगदान और बलिदान से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में गढ़वाल मंडल आयुक्त आनन्द स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, ब्रिगेडियर आर.एस. थापा, कर्नल प्रतुल थपलियाल, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि मोहन बिष्ट, लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित जोशी, लेफ्टिनेंट कर्नल एस.एस. सिद्दीकी, मेजर के.डी. सिंह और सूबेदार मेजर रघुवीर सिंह भण्डारी समेत कई सैन्य अधिकारी एवं जवान मौजूद रहे।
दीपावली के इस आयोजन के जरिए मुख्यमंत्री ने सैनिकों के साथ केवल त्योहार की खुशियां ही साझा नहीं कीं, बल्कि यह भी रेखांकित किया कि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले जवानों और उनके परिवारों का सम्मान करना समाज तथा सरकार दोनों का दायित्व है।

