देहरादून ; 16.09.2026।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के लिए मजबूत और सुविधाजनक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कदम उठा रही है। सरकार का फोकस केवल प्रदेश की प्राकृतिक खूबसूरती को फिल्मों की शूटिंग के लिए उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय कलाकारों, तकनीकी विशेषज्ञों और फिल्म से जुड़े युवाओं को रोजगार व पहचान के नए अवसर देने पर भी है।
इसी क्रम में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद की ओर से उत्तराखंड फिल्म पुरस्कार-2024 एवं 2025 का पहली बार आयोजन किया जा रहा है। उत्तराखंड फिल्म नीति-2024 के तहत आयोजित होने वाले इन पुरस्कारों में प्रदेश में निर्मित अथवा फिल्मांकित फिल्मों के साथ उत्तराखंड की क्षेत्रीय बोलियों, हिंदी तथा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भारतीय भाषाओं में बनी फिल्मों को भी सम्मानित किया जाएगा।
पुरस्कारों के जरिए केवल फिल्मों को ही नहीं, बल्कि अभिनय, निर्देशन, तकनीकी कार्य और फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को भी मंच दिया जाएगा। पुरस्कारों के लिए 15 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे।
शूटिंग के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिला फायदा
उत्तराखंड की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता लंबे समय से फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करती रही है। हिमालयी क्षेत्र, नदियां, झीलें, जंगल, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक धरोहर और पर्वतीय बस्तियां फिल्मों के लिए अलग-अलग तरह की लोकेशन उपलब्ध कराती हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच प्रदेश में 1,440 से अधिक फिल्मों की शूटिंग और एनओसी से संबंधित गतिविधियां दर्ज की गईं। फिल्म इकाइयों की आवाजाही का असर केवल फिल्म क्षेत्र तक नहीं रहा, बल्कि होटल, परिवहन, भोजन व्यवस्था, स्थानीय गाइड, उपकरण उपलब्ध कराने वाली सेवाओं और दूसरे छोटे व्यवसायों को भी इसका लाभ मिला।
इससे पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहन, फिल्मों को आर्थिक सहायता
राज्य सरकार की ओर से पात्र फिल्मों को निर्धारित नियमों के तहत वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच 52 फिल्मों को फिल्म अनुदान उपलब्ध कराया गया। खास बात यह है कि इस सहायता के दायरे में केवल हिंदी फिल्में ही नहीं, बल्कि गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी और अन्य उत्तराखंडी भाषाओं में बनने वाली फिल्में भी शामिल हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 25 फिल्मों को अनुदान दिया गया, जिससे क्षेत्रीय सिनेमा को संस्थागत सहयोग मिलने की दिशा में राज्य की पहल को गति मिली है।
शूटिंग लोकेशन से आगे बढ़कर फिल्म निर्माण केंद्र बनाने की तैयारी
फिल्म नीति-2024 के जरिए सरकार ने प्रदेश में फिल्म गतिविधियों का दायरा व्यापक करने की योजना बनाई है। नीति में फिल्म शूटिंग के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन और अनुदान, फिल्म पुरस्कार, प्रशिक्षण कार्यक्रम, छात्रवृत्ति, फिल्म सिटी तथा पोस्ट-प्रोडक्शन से जुड़ी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड को केवल खूबसूरत लोकेशन उपलब्ध कराने वाले राज्य की पहचान से आगे ले जाकर फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया के लिए सुविधाजनक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
देशभर में बनी उत्तराखंड की फिल्म फ्रेंडली पहचान
फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। राज्य को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में Most Film Friendly State और 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में Most Film Friendly State – Special Mention से सम्मानित किया गया।
नैनीताल, मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, टिहरी, चकराता, चोपता, हर्षिल और औली समेत चारधाम क्षेत्र तथा जिम कॉर्बेट जैसे स्थान फिल्म निर्माताओं के बीच अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। गढ़वाल और कुमाऊं के कई अन्य क्षेत्र भी लगातार फिल्मांकन के लिए सामने आ रहे हैं।
युवाओं को फिल्म क्षेत्र से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की पहल में स्थानीय युवाओं को फिल्म उद्योग से जोड़ना भी अहम हिस्सा है। अभिनय से लेकर कैमरा, एडिटिंग, तकनीकी संचालन, प्रोडक्शन और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं को अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है।
फिल्म विधा के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और क्षेत्रीय फिल्मों को प्रोत्साहन जैसी योजनाएं स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही प्रदेश में आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं। इससे उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोकभाषाओं और स्थानीय कहानियों को भी बड़े मंच तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी के अनुसार, उत्तराखंड फिल्म पुरस्कार-2024 एवं 2025 का आयोजन प्रदेश की फिल्मों और फिल्म प्रतिभाओं को पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पुरस्कारों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों, तकनीकी कर्मियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कथानकों को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, धामी सरकार की फिल्म नीति के तहत उत्तराखंड में फिल्म गतिविधियों को शूटिंग तक सीमित रखने के बजाय प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, प्रतिभा विकास, पोस्ट-प्रोडक्शन और पुरस्कारों तक विस्तारित करने की दिशा में काम हो रहा है। उत्तराखंड फिल्म पुरस्कार-2024 एवं 2025 इसी व्यापक प्रयास का नया अध्याय माना जा रहा है।

