देहरादून ; 29.10.2026,
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लगातार बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। शहर की सड़कों पर बढ़ते वाहनों, सीमित पार्किंग सुविधाओं और प्रमुख चौराहों पर लगने वाले जाम को देखते हुए अब यातायात प्रबंधन के मौजूदा तरीकों की समीक्षा की जा रही है। प्रशासन का जोर ऐसे समाधान तलाशने पर है, जिनसे स्थानीय लोगों को रोजाना होने वाली परेशानी से राहत मिले और पर्यटन सीजन के दौरान भी सड़कों पर यातायात सुचारु बना रहे।
इस दिशा में गृह सचिव शैलेश बगौली भी लगातार निगरानी कर रहे हैं। वहीं, जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ ठोस प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। योजना में केवल पार्किंग की संख्या बढ़ाने तक सीमित रहने के बजाय सड़क नेटवर्क, यातायात के दबाव वाले क्षेत्रों और भविष्य में वाहनों की बढ़ती संख्या को भी ध्यान में रखने की तैयारी है।
मसूरी के यातायात अनुभव के आधार पर देहरादून में तैयारी
मसूरी में पर्यटन सीजन के दौरान वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए वहां 42 पार्किंग स्थलों को चिह्नित किया गया है। साथ ही, अतिक्रमण हटाने और अधिक दबाव वाले स्थानों पर सुधार की संभावनाओं पर भी काम किया गया है।
अब देहरादून के लिए भी यातायात संबंधी समस्याओं का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। प्रशासन यह समझने की कोशिश कर रहा है कि किन सड़कों और चौराहों पर वाहनों की आवाजाही सबसे अधिक प्रभावित होती है और किन स्थानों पर छोटे सुधारों से भी बड़ा लाभ मिल सकता है। मसूरी जाने वाले पर्यटक वाहनों का शहर के भीतर बढ़ता दबाव भी इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
23 प्रस्तावित पार्किंग स्थलों की फिर होगी समीक्षा
देहरादून और मसूरी में पार्किंग की समस्या कम करने के लिए पहले 23 स्थान प्रस्तावित किए गए थे। अब इन स्थलों की उपयोगिता का दोबारा परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन यह देखेगा कि संबंधित स्थानों पर पार्किंग विकसित करना कितना व्यावहारिक होगा और इससे आसपास के यातायात पर क्या असर पड़ेगा।
इसके लिए उपलब्ध जमीन, सड़क की चौड़ाई, वाहनों के प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा पार्किंग की संभावित क्षमता जैसे पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही यह भी परखा जाएगा कि किसी स्थान पर पार्किंग बनने से सड़क किनारे खड़े वाहनों की समस्या कम होगी या वहां वाहनों की आवाजाही और अधिक बढ़ सकती है।
मसूरी के मौजूदा और प्रस्तावित पार्किंग स्थलों की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद को दी गई है। वहीं, उप जिलाधिकारी सदर से देहरादून की पार्किंग व्यवस्था का ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा गया है। प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और भूमि की उपलब्धता भी समीक्षा का हिस्सा होगी।
शहर के भीतरी हिस्सों में दबाव कम करने पर जोर
प्रशासन की योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मसूरी जाने वाले वाहनों को देहरादून के भीड़भाड़ वाले इलाकों से गुजरने की मजबूरी कम करना है। इसके लिए शहर के बाहरी क्षेत्रों से पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले संभावित मार्गों और सड़क संपर्क का अध्ययन किया जाएगा।
इसके साथ ही ऐसी व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें पर्यटक अपने निजी वाहन निर्धारित पार्किंग स्थल पर खड़े कर आगे की यात्रा शटल सेवा के माध्यम से कर सकें। इससे मुख्य मार्गों पर वाहनों की संख्या नियंत्रित करने और पर्यटन सीजन में लगने वाले जाम को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस तरह की व्यवस्था लागू करने से पहले पार्किंग स्थलों तक पहुंचने वाली सड़कों की क्षमता, पर्यटकों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता का आकलन आवश्यक होगा। फिलहाल किसी नए वैकल्पिक मार्ग या शटल सेवा को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
ट्रैफिक लाइट और जाम वाले चौराहों की भी होगी जांच
शहर में यातायात को व्यवस्थित करने के लिए ट्रैफिक सिग्नल की मौजूदा स्थिति और उनके संचालन की समीक्षा भी प्रस्तावित है। जिन चौराहों पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है, वहां सड़क की बनावट, यातायात के प्रवाह और सिग्नल व्यवस्था में सुधार की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
इसके अलावा मौजूदा पार्किंग स्थलों का बेहतर इस्तेमाल, सड़क किनारे अतिक्रमण से पैदा होने वाली बाधाओं को दूर करना और अलग-अलग मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाना भी योजना में शामिल किया जा सकता है। इन उपायों का उद्देश्य केवल जाम के दौरान यातायात नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उन कारणों को कम करना है जिनकी वजह से बार-बार जाम की स्थिति बनती है।
तात्कालिक राहत और दीर्घकालिक विकास की अलग-अलग योजना
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को तत्काल लागू किए जा सकने वाले सुधारों और लंबे समय में विकसित किए जाने वाले बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रस्ताव अलग-अलग तैयार करने के निर्देश दिए हैं। शुरुआती स्तर पर चौराहों में सुधार, मौजूदा पार्किंग का बेहतर प्रबंधन और यातायात संचालन को व्यवस्थित करने जैसे कदमों पर ध्यान दिया जाएगा।
वहीं, दीर्घकालिक योजना में नए पार्किंग स्थलों, वैकल्पिक मार्गों, सड़क संपर्क और भविष्य की यातायात जरूरतों को शामिल किया जाएगा। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को यातायात पुलिस, परिवहन विभाग और टाउन प्लानर के साथ मिलकर व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
योजना लागू होने के बाद सामने आएगा असर
देहरादून में यातायात सुधार की इस कवायद से शहर की पार्किंग व्यवस्था और प्रमुख मार्गों की समस्याओं का व्यवस्थित समाधान तलाशने की उम्मीद है। हालांकि, प्रस्तावों की समीक्षा, भूमि की उपलब्धता, परियोजनाओं की व्यवहार्यता और संबंधित विभागों की तैयारी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी।
फिलहाल प्रशासन का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे पर्यटन सीजन में मसूरी जाने वाले वाहनों का दबाव शहर के भीतर कम हो और स्थानीय नागरिकों को भी रोजाना के आवागमन में राहत मिल सके। अब इस पूरी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तैयार किए जाने वाले प्रस्ताव कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं और यातायात की वास्तविक समस्याओं को कितना प्रभावी ढंग से दूर कर पाते हैं।

