देहरादून ; 09.10.2026,
देहरादून। उत्तराखंड के युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं अब प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी तलाश की जा रही हैं। विदेशी कंपनियों और विभिन्न क्षेत्रों में कुशल कामगारों की मांग को देखते हुए राज्य में युवाओं को भाषा और कार्यकुशलता का प्रशिक्षण देने की तैयारी तेज की गई है। इसी दिशा में संचालित मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत अब तक 106 युवा विदेश में नौकरी हासिल कर चुके हैं। सरकार का फोकस अब नए देशों में रोजगार की संभावनाएं तलाशने और युवाओं को वहां की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने पर है।
इस योजना के तहत जापान में 75, सऊदी अरब में 30 और जर्मनी में एक युवा रोजगार प्राप्त कर चुका है। ये युवा स्वास्थ्य सेवाओं, हॉस्पिटैलिटी समेत विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। विदेश में नौकरी पाने के लिए संबंधित देश की भाषा और कामकाज की समझ जरूरी होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में विदेशी भाषा प्रशिक्षण की व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है।
158 केंद्रों में मिल रहा भाषा सीखने का अवसर
युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से उत्तराखंड में जर्मन और जापानी भाषा के कुल 158 प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को उन देशों में काम करने के लिए जरूरी भाषाई दक्षता हासिल करने का अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही उत्तरकाशी और टिहरी जिलों में भी विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की तैयारी है, जिससे इन क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर मई 2023 में इस योजना को मंजूरी दी गई थी। इसे लागू करने के लिए कौशल एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत विदेश रोजगार प्रकोष्ठ गठित किया गया है। इस व्यवस्था के जरिए विदेशों में उपलब्ध नौकरियों की पहचान करने और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है।
तीन देशों में भी तलाशे जा रहे रोजगार के रास्ते
विदेश में नौकरी के विकल्प बढ़ाने के लिए अब जमैका, इथियोपिया और जाम्बिया में संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनयिकों के साथ बैठक कर वहां कुशल मानव संसाधन की मांग और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की।
बैठक के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित देशों की जरूरतों का आकलन कर युवाओं को उसी हिसाब से प्रशिक्षण देने की कार्ययोजना तैयार की जाए। इससे भविष्य में रोजगार के नए क्षेत्रों की पहचान करने और युवाओं को अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
प्रशिक्षण से रोजगार तक जोड़ने पर जोर
राज्य सरकार की योजना युवाओं को केवल भाषा सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें विदेशों में काम करने के लिए जरूरी कौशल से लैस करना भी इसका अहम हिस्सा है। अलग-अलग देशों में रोजगार की प्रकृति और कामकाज के तरीके अलग होते हैं। ऐसे में जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना युवाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योजना के तहत विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाने और वैश्विक मांग के अनुरूप युवाओं को दक्ष बनाने पर जोर दिया है। अधिकारियों को इस संबंध में आगे की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उत्तराखंड में रोजगार के अंतरराष्ट्रीय विकल्पों का विस्तार करने की यह पहल उन युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जो अपने कौशल के आधार पर विदेश में काम करना चाहते हैं। प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार और नए देशों में संभावनाओं की तलाश के जरिए राज्य में युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

