देहरादून ; 23.08.2026।
हरिद्वार। अवधूत मण्डल आश्रम में आयोजित संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का मुद्दा प्रमुखता से उठा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जहां देश में बार-बार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए संत समाज से लोगों को जागरूक करने की अपील की, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे सुशासन, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और विकास की निरंतरता से जुड़ा राष्ट्रीय विषय बताया।
चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन लगातार चुनावी गतिविधियां होने से सरकारी तंत्र का काफी समय निर्वाचन संबंधी तैयारियों में खर्च होता है। अधिकारियों और कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी लगने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है और कई बार विकास योजनाओं की गति भी धीमी पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था बनती है तो समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों की बचत हो सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चुनावों की आवृत्ति कम होने से सरकार और प्रशासन को जनहित से जुड़े कामों पर लगातार ध्यान देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने संत समाज से इस विषय को आम लोगों तक पहुंचाने और इसके विभिन्न पहलुओं को समझाने की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ संबंधी प्रयास का समर्थन करते हुए इसे देश के व्यापक हित से जुड़ी पहल बताया।
धामी ने बताया राष्ट्रहित और सुशासन से जुड़ा विषय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को केवल राजनीतिक नजरिये से देखने के बजाय देश की प्रशासनिक क्षमता और विकास की जरूरतों के संदर्भ में समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में चुनाव लोकतंत्र का उत्सव हैं, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का असर शासन व्यवस्था और सरकारी कामकाज पर पड़ना स्वाभाविक है।
धामी ने कहा कि देश तेजी से आर्थिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे दौर में सरकार का अधिक से अधिक समय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने में लगना चाहिए। उनके अनुसार विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए ऐसी व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, जिसमें चुनावी जिम्मेदारियों और नियमित प्रशासनिक कार्यों के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को राष्ट्रीय विमर्श में प्रमुखता देने का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर विकास जरूरी है। उन्होंने संत-महात्माओं से इस विषय पर समाज को सही जानकारी देने और सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
‘वंदे मातरम’ पर भी चौहान का जोर
समागम में शिवराज सिंह चौहान ने ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण स्वरूप के सम्मान की बात भी रखी। उन्होंने कहा कि यह देश की स्वतंत्रता चेतना, राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता से जुड़ा भाव है। उन्होंने संत समाज से इस विषय पर भी लोगों के बीच राष्ट्रभावना को मजबूत करने वाली जागरूकता पैदा करने की अपील की।
धामी ने भी संत समाज की सामाजिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में संतों ने हमेशा समाज को सही दिशा देने और राष्ट्रहित के मुद्दों पर मार्गदर्शन करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र मजबूत हो, विकास की गति बनी रहे, भारतीय संस्कृति सुरक्षित रहे और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो—इसी भावना के साथ आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है।
अवधूत मण्डल आश्रम का यह संत समागम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा कि इसमें ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर प्रशासनिक दक्षता, विकास की निरंतरता और राष्ट्रीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे पहलुओं पर चर्चा हुई।

