13 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास कार्यों को लेकर सरकार के भीतर मंथन तेज होता दिखाई दे रहा है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर लोक निर्माण और सिंचाई विभागों से जुड़े बड़े ठेकों को छोटे-छोटे पैकेजों में विभाजित करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इससे प्रदेश के स्थानीय ठेकेदारों को बड़े कार्यों में भागीदारी का ज्यादा अवसर मिल सकेगा।
मंत्री ने मुख्यमंत्री के सामने यह मुद्दा रखते हुए कहा कि वर्तमान में कई बड़े निर्माण कार्यों के ठेके बड़े आकार में होने के कारण स्थानीय स्तर के ठेकेदारों के लिए उनमें प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो सकता है। यदि ऐसे कार्यों को जरूरत के अनुसार छोटे पैकेजों में बांटा जाता है, तो अधिक स्थानीय एजेंसियां और ठेकेदार निविदा प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
सतपाल महाराज के मुताबिक छोटे पैकेजों में काम मिलने से केवल स्थानीय ठेकेदारों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि निर्माण कार्यों से जुड़े मजदूरों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे निर्माण गतिविधियों का लाभ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना रहेगी।
मंत्री ने यह भी तर्क दिया कि स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ने से विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और श्रमशक्ति का इस्तेमाल होने से कई कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।
विकास कार्यों के साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा सहारा
महाराज ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश के हित और स्थानीय युवाओं के रोजगार को ध्यान में रखते हुए लोक निर्माण एवं सिंचाई विभाग के बड़े कार्यों को छोटे पैकेजों में बांटने के लिए प्रभावी व्यवस्था पर विचार किया जाए। उनका मानना है कि इससे सरकारी परियोजनाओं में स्थानीय सहभागिता बढ़ेगी और निर्माण से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने दिया नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सतपाल महाराज के प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए इस विषय में नियमानुसार परीक्षण कराने और आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया है। अब संबंधित विभागों में इस प्रस्ताव के व्यावहारिक और नियमगत पहलुओं पर विचार किए जाने की उम्मीद है।
सरकार यदि इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो इसका सीधा असर प्रदेश में सरकारी निर्माण परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया और स्थानीय ठेकेदारों की भागीदारी पर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बड़े ठेकों को छोटे पैकेजों में बांटने के लिए किन नियमों और मानकों को अपनाया जाता है।

