देहरादून ; 21.08.2026,
देहरादून। उत्तराखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना’ के तहत चौपाल-2026 का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को उद्यमिता से जोड़ने के साथ उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है। योजना के माध्यम से अब तक 13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग मिल चुका है। वहीं 8 हजार से अधिक महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आजीविका एवं व्यवसाय के नए अवसरों से जोड़ा गया है।
तेरागांव में बनेगा राज्य स्तरीय विपणन केंद्र
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने देहरादून के आईटी पार्क के समीप तेरागांव में राज्य स्तरीय विपणन केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इस केंद्र के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों को एक बड़े बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय उत्पादों को उचित बाजार, पैकेजिंग और विपणन की सुविधा मिले तो पहाड़ के छोटे-छोटे कारोबार भी बड़े आर्थिक अवसरों में बदल सकते हैं।
महिलाओं की मेहनत बन रही कारोबार की पहचान
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 5 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। इनमें से 3 लाख से ज्यादा महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं पारंपरिक उत्पादों को अब घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं रख रही हैं। मंडुवा, झंगोरा, पहाड़ी मसाले, दालें, शहद, अचार-जैम, हस्तशिल्प, ऊनी सामान और स्थानीय कला से जुड़े उत्पादों को वे व्यवसाय का रूप दे रही हैं। इससे पारंपरिक हुनर को पहचान मिलने के साथ परिवारों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से स्थानीय उत्पादों को ब्रांड पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के गांवों में तैयार होने वाले उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ को एक व्यापक ब्रांड के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को एक समान पहचान देकर उनकी बाजार क्षमता बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति तक उत्तराखंड का उत्पाद पहुंचे तो उसके साथ केवल एक सामान नहीं, बल्कि पहाड़ की मेहनत, संस्कृति, परंपरा और स्थानीय जीवन की झलक भी पहुंचे—सरकार इसी सोच के साथ ग्रामीण उत्पादों के लिए बाजार तैयार कर रही है।
ग्रामीण बाजारों का नेटवर्क मजबूत करने पर जोर
राज्य में किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने तथा उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि उत्पादन के साथ-साथ संग्रहण, प्रसंस्करण और बिक्री की व्यवस्था भी गांवों के करीब विकसित हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमिता को बढ़ावा देने का उद्देश्य केवल आय बढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में अवसर उपलब्ध कराना भी है। उनका कहना था कि उत्तराखंड का युवा नौकरी खोजने के बजाय दूसरों को रोजगार देने की क्षमता विकसित करे, यही ग्रामीण उद्यमिता की बड़ी दिशा है।
पलायन रोकने में अहम भूमिका निभाएगा ग्रामीण कारोबार
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण उद्यमिता को पलायन की चुनौती से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि गांवों में यदि स्थायी आजीविका और स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे तो लोगों को मजबूरी में गांव छोड़ने की जरूरत कम होगी। इसी उद्देश्य से ‘ग्रामोत्थान परियोजना (रीप)’ के माध्यम से अति-निर्धन ग्रामीण परिवारों को आजीविका के साधनों से जोड़ने और स्थानीय रोजगार बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गांवों की आर्थिक मजबूती सीधे तौर पर पूरे राज्य की मजबूती से जुड़ी है।
13 जिलों में पहुंचेगी उद्यमशाला चौपाल
‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल’ का आयोजन प्रदेश के सभी 13 जनपदों में किया जा रहा है। इन आयोजनों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वरोजगार, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। योजना की जानकारी दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए प्रचार वाहनों को भी गांव-गांव भेजा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी व्यापक स्तर पर पहुंचेगा, जब पात्र लोगों को योजनाओं की जानकारी और आवेदन से लेकर लाभ लेने तक की प्रक्रिया आसानी से समझ आए।
लखपति दीदियों और महिला उद्यमियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लखपति दीदियों और महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से संबंधित पुस्तक और वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री ने एकीकृत कृषि क्लस्टर आधारभूत प्रशिक्षण एवं मॉड्यूल, शिशु एवं लघु बाल आहार मॉड्यूल तथा महिलाओं और बच्चों में एनीमिया की रोकथाम एवं प्रबंधन से जुड़े मॉड्यूल का भी लोकार्पण किया।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, गणेश जोशी, खजान दास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, विधायक सविता कपूर, सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर चौपाल-2026 को सरकार की उस व्यापक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें गांव के हुनर को कारोबार, स्थानीय उत्पादों को बाजार और ग्रामीण परिवारों की मेहनत को स्थायी आय के अवसर में बदलने पर जोर दिया जा रहा है।

