24 july 2026 ; Dehradun!
नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की बैठक के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के समग्र विकास का विजन प्रस्तुत करते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप ‘विकसित उत्तराखंड’ की रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2027 तक उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को दोगुना करने के लक्ष्य पर तेजी से कार्य कर रही है और इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से निवेश, बुनियादी ढांचे का विस्तार तथा रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बैठक में हिमालयी राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों और विकास संबंधी चुनौतियों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्यों में विकास परियोजनाओं की लागत मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक होती है, इसलिए केंद्र सरकार को ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग नीतिगत व्यवस्था और विशेष आर्थिक सहयोग प्रदान करना चाहिए।
धामी ने पर्यावरण संरक्षण में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए ग्रीन बोनस की मांग भी दोहराई। उनका कहना था कि राज्य अपने विशाल वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से पूरे देश को पर्यावरणीय लाभ पहुंचाता है, इसलिए इस योगदान के अनुरूप वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए आपदा प्रबंधन, पुनर्वास और राहत कार्यों के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री की बातों को गंभीरता से सुना और हिमालयी राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने राज्यों के संतुलित और समावेशी विकास को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए केंद्र और राज्यों के बेहतर समन्वय पर बल दिया।
उत्तराखंड सरकार का मानना है कि पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, उद्योग, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेज गति से कार्य कर राज्य को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। इसी दिशा में राज्य सरकार आने वाले वर्षों में विकास परियोजनाओं को गति देने और निवेश को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है

