5 august 2026 ; Dehradun।
देहरादून। राजधानी देहरादून में साइबर ठगों ने एक बार फिर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर बड़ी ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। इस बार ठगों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और एटीएस का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग को आतंकवाद से जुड़े मामले में फंसाने की धमकी दी और डर का माहौल बनाकर उनसे 13 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पटेलनगर क्षेत्र के गीता एन्क्लेव, मोहब्बेवाला निवासी जगदीश सिंह उसराथान ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 30 जुलाई को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को वरिष्ठ जांच अधिकारी बताते हुए कहा कि पुणे में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान उनका नाम सामने आया है और उन पर लालकिला बम ब्लास्ट के आरोपी की मदद करने का संदेह है।
इसके बाद पीड़ित को वीडियो कॉल के जरिए कथित तौर पर अन्य अधिकारियों से भी जोड़ा गया। ठगों ने खुद को विभिन्न जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति जब्ती से जुड़े फर्जी दस्तावेज दिखाए। साथ ही यह भरोसा दिलाया कि यदि वे जांच में सहयोग करेंगे तो मामला जल्द समाप्त कर दिया जाएगा।
डर और मानसिक दबाव में आए बुजुर्ग ने ठगों के निर्देशों का पालन करते हुए अपने बैंक खातों, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) और सावधि जमा (एफडी) से धनराशि एकत्र की। इसके बाद करीब 13 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से महाराष्ट्र स्थित एक चालू बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। कुछ समय बाद जब उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ तो उन्होंने पटेलनगर कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शिकायत के आधार पर संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। साइबर ठगों तक पहुंचने के लिए डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।
पुलिस की अपील: ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही जांच के नाम पर बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कराने के निर्देश देती है।
यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, एनआईए, एटीएस, कस्टम्स या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, केस दर्ज होने या संपत्ति जब्त करने की धमकी दे और पैसे भेजने का दबाव बनाए, तो ऐसे कॉल पर तुरंत विश्वास न करें। कॉल समाप्त कर संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।
फिर बढ़ा डिजिटल अरेस्ट का खतरा
देहरादून में पिछले कुछ महीनों तक इस तरह के मामलों में कमी देखने को मिली थी, लेकिन ताजा घटना ने साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है, इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या वित्तीय लेनदेन के दबाव में आने से पहले पूरी तरह सत्यापन करना जरूरी है।

