देहरादून ; 26.08.2026।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में परिवहन, स्वास्थ्य, कार्मिक और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक में खास तौर पर दूसरे राज्यों से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले हाइब्रिड वाहनों को ग्रीन सेस के दायरे में लाने का निर्णय लिया गया। वहीं, सीएनजी वाहनों को फिलहाल इस शुल्क से बाहर रखा गया है।
हाइब्रिड वाहनों को देना होगा ग्रीन सेस
कैबिनेट के फैसले के बाद अब दूसरे राज्यों से उत्तराखंड आने वाले हाइब्रिड वाहनों पर भी प्रदेश की सीमा में प्रवेश के समय ग्रीन सेस लागू होगा। इससे पहले हाइब्रिड वाहनों को इस शुल्क से छूट प्राप्त थी। सरकार का तर्क है कि हाइब्रिड वाहन इलेक्ट्रिक मोटर के साथ-साथ पेट्रोल या डीजल का भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह प्रदूषण मुक्त श्रेणी में रखना उचित नहीं है।
इसके विपरीत, सीएनजी से संचालित वाहनों को फिलहाल ग्रीन सेस से छूट जारी रहेगी।
नई ईवी नीति से पहले दूसरे राज्यों का अध्ययन
बैठक में प्रदेश की आगामी इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लेकर भी चर्चा हुई। परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने अधिकारियों से कहा कि नई नीति तैयार करने से पहले देश के विभिन्न राज्यों में लागू ईवी नीतियों का अध्ययन किया जाए। इसके आधार पर उत्तराखंड की जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक नीति तैयार की जाएगी।
वेतन मैट्रिक्स में लेवल-16 हटाया गया
सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक अन्य फैसले में उत्तराखंड के वेतन मैट्रिक्स से लेवल-16 को हटाने को मंजूरी दी गई। राज्य में पहले लेवल-13 क के बाद लेवल-15 और लेवल-16 का प्रावधान था, जबकि केंद्र की व्यवस्था में इसके बाद लेवल-14 और लेवल-15 आता है। इसी व्यवस्था के अनुरूप राज्य के वेतन मैट्रिक्स में संशोधन किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव से संबंधित कर्मचारियों के मौजूदा वेतनमान पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
स्वास्थ्य विभाग के सांख्यिकी संवर्ग के लिए नई सेवा नियमावली
स्वास्थ्य विभाग में सांख्यिकी संवर्ग के समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ पदों के लिए नई सेवा नियमावली को भी मंजूरी मिल गई। अब तक इन पदों पर उत्तर प्रदेश की पुरानी नियमावली के आधार पर कार्य किया जा रहा था। नई व्यवस्था में कर्मचारियों की वरिष्ठता, पदोन्नति और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।
मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन करेगा दवाओं की खरीद
स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए उत्तराखंड मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। भविष्य में दवाइयों, सर्जिकल सामग्री, रसायनों, चिकित्सा उपकरणों और इंप्लांट्स की खरीद इस कॉरपोरेशन के माध्यम से किए जाने की योजना है।
सरकार का मानना है कि केंद्रीकृत खरीद व्यवस्था से विभागीय स्तर पर विशेषज्ञों की कमी की समस्या कम होगी और जरूरी चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
हरिद्वार में एनसीडीसी की शाखा के लिए जमीन
रोगों की निगरानी और महामारी जैसे प्रकोपों से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए हरिद्वार में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की शाखा स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज की 65 एकड़ भूमि में से एक एकड़ जमीन 99 वर्ष की लीज पर दी जाएगी। भूमि का लीज मूल्य एक रुपये निर्धारित किया गया है।
उप कारापाल पदोन्नति व्यवस्था में बदलाव
जेल विभाग से जुड़े प्रस्ताव को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली। उप कारापाल पद के 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटे में अब 90 प्रतिशत प्रधान बंदीरक्षकों और 10 प्रतिशत महिला बंदीरक्षकों को पदोन्नति देने का प्रावधान किया गया है।
लोकायुक्त खोजबीन समिति के लिए नियम तय होंगे
लोकायुक्त खोजबीन समिति के कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए अलग नियमावली तैयार करने को मंजूरी दी गई है। इसमें समिति के सदस्यों का कार्यकाल, उन्हें मिलने वाले भत्ते और लोकायुक्त तथा सदस्यों के पदों के लिए प्राप्त आवेदनों के आधार पर पैनल तैयार करने की प्रक्रिया तय की जाएगी।
ऋषिकेश में कैंसर अस्पताल के लिए स्टांप ड्यूटी में राहत
कैंसर मरीजों के उपचार के लिए ऋषिकेश में अस्पताल स्थापित करने की दिशा में भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया। अंत्योदय फाउंडेशन को अस्पताल निर्माण के लिए दी गई जमीन की गिफ्ट डीड पर स्टांप ड्यूटी में छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। सरकार ने इसे धर्मार्थ और जनहित से जुड़े कार्यों को प्रोत्साहन देने वाला कदम बताया है।
कुल मिलाकर, कैबिनेट के फैसलों में पर्यावरण शुल्क, इलेक्ट्रिक वाहन नीति, सरकारी सेवा व्यवस्था और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिखाई दिया है।

