देहरादून ; 25 अगस्त 2026,
देहरादून। उत्तराखण्ड में शिक्षा को तकनीक के सहारे अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में मंगलवार को एक नई पहल शुरू हुई। लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के ‘मुक्त ज्ञान कोष’ का लोकार्पण किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियां विद्यार्थियों के सपनों की राह में रुकावट नहीं बननी चाहिए और डिजिटल संसाधन इस दूरी को कम करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
लोकार्पण के दौरान राज्यपाल गुरमीत सिंह ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी सहित पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ज्ञान को सीमित दायरे में रखने के बजाय उसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना समय की जरूरत है। उनके अनुसार, ‘मुक्त ज्ञान कोष’ सिर्फ पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराने वाला पोर्टल नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नए विचारों से जोड़ने वाला डिजिटल माध्यम है।
राज्यपाल ने दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों पर दिया विशेष जोर
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने उत्तराखण्ड की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के कई हिस्सों में विद्यार्थियों को शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंचने के लिए दूरी और कठिन रास्तों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि अध्ययन सामग्री मोबाइल और डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हो, तो स्थान की बाधा काफी कम हो सकती है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ में रास्ते कठिन हो सकते हैं, लेकिन ज्ञान तक पहुंच आसान होनी चाहिए। ‘मुक्त ज्ञान कोष’ इसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास है, जिससे गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी भी बेहतर शैक्षणिक सामग्री का उपयोग कर सकें।
पढ़ाई के साथ शोध के लिए भी उपयोगी मंच
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से तैयार इस डिजिटल मंच पर केवल पाठ्यक्रम आधारित सामग्री ही नहीं, बल्कि शोध से जुड़े कई संसाधनों को भी शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को ई-पुस्तकों और अध्ययन सामग्री के साथ शिक्षकों के शोध कार्य, शोध-पत्र, शोध प्रबंध और शोध से संबंधित डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा मंच पर देश और विदेश के विभिन्न मुक्त शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच बनाने की सुविधा भी रखी गई है। इससे शोधार्थियों को अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाने और अपने अध्ययन को व्यापक बनाने में मदद मिल सकती है।
ज्ञान को विकास से जोड़ने पर राज्यपाल का जोर
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि जब किसी युवा को सही ज्ञान और सीखने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं, तो उसके भीतर आत्मविश्वास और नई संभावनाओं का विकास होता है। यही प्रतिभा आगे चलकर समाज और प्रदेश की प्रगति में योगदान देती है।
उन्होंने युवाओं से डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल केवल मनोरंजन या सामान्य जानकारी तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग अध्ययन, नवाचार, शोध और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा और ज्ञान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश का भविष्य ऐसे युवाओं से बनेगा, जो ज्ञान के साथ कौशल, जिम्मेदारी और अच्छे संस्कारों से भी जुड़े हों।
‘मुक्त ज्ञान कोष’ की शुरुआत को उत्तराखण्ड में डिजिटल शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक ऐसे कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जो खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जिनके लिए भौगोलिक दूरी अब तक उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच में चुनौती रही है।

