देहरादून ; 4 नवम्बर 2026,
देहरादून। उत्तराखण्ड में सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग, निजी निवेश को प्रोत्साहन और रोजगार के नए अवसर विकसित करने को लेकर उत्तराखण्ड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। इस बीच राज्य सरकार ने बोर्ड की कार्ययोजना को लेकर सामने आ रही चर्चाओं और कथित भ्रामक जानकारियों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। सरकार का कहना है कि एसेट मॉनेटाइजेशन और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के माध्यम से प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। इसके तहत केवल कुछ चयनित सरकारी भूमि पार्सल पर ही संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसका उद्देश्य सरकारी संपत्तियों का मनमाना हस्तांतरण नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग राज्य के आर्थिक विकास के लिए करना है।
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि UIIDB के माध्यम से प्रस्तावित गतिविधियों को लेकर पहले भी जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद कई ऐसी जमीनों और परिसंपत्तियों को वर्तमान योजना से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिनका वास्तविक प्रस्तावों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि तथ्यों को सही परिप्रेक्ष्य में समझना जरूरी है, ताकि आम जनता के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति न बने।
दो से तीन महीने में 6-7 भूमि पार्सल की बिडिंग का लक्ष्य
सरकार के अनुसार प्रदेश की आर्थिक संभावनाओं को बढ़ाने के लिए पहले व्यापक स्तर पर अध्ययन कराया गया था। इसमें यह विचार सामने आया कि सरकारी स्वामित्व वाली ऐसी भूमि, जिसका उत्पादक उपयोग किया जा सकता है, उसे योजनाबद्ध तरीके से निवेश और विकास गतिविधियों से जोड़ा जाए। इसी आधार पर कुछ सीमित भूमि पार्सल की पहचान की गई है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि वर्तमान में लगभग 6 से 7 चयनित भूमि पार्सल पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। आगामी दो से तीन माह के भीतर इनकी बिडिंग प्रक्रिया को आगे ले जाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इससे निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे और प्रदेश में उद्योग, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी तथा अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों का विस्तार हो सकेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ स्थानों पर बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों को योजना में शामिल किए जाने की जो बातें प्रचारित की जा रही हैं, वे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती हैं।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश से हजारों रोजगार की उम्मीद
उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्यटन की विविधता हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के विकास के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक पर्यटन केंद्रों, एडवेंचर गतिविधियों और वेलनेस टूरिज्म के कारण यहां देश-विदेश के पर्यटकों के लिए लगातार संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार इसी क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
प्रमुख सचिव के अनुसार प्रस्तावित हॉस्पिटैलिटी निवेश के माध्यम से करीब 7,000 से 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन से जुड़ी सहायक गतिविधियों के विस्तार से लगभग 10,000 से 15,000 लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।
इसके अलावा इन परियोजनाओं से GST और अन्य राजस्व माध्यमों के जरिए राज्य को प्रतिमाह लगभग 300 करोड़ रुपये की प्राप्ति की संभावना जताई गई है। सरकार का कहना है कि निवेश का लाभ केवल बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ेगा।
चौबटिया और धनोल्टी की जमीनें मौजूदा प्रस्ताव से बाहर
सरकारी भूमि को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रमुख सचिव ने अलग-अलग स्थानों की स्थिति भी स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि चौबटिया स्थित भूमि की व्यवहार्यता का परीक्षण किया गया था, लेकिन अपेक्षित संभावनाएं नहीं मिलने के कारण उसे प्रस्ताव से हटा दिया गया।
इसी तरह धनोल्टी की भूमि के परीक्षण में उसके वन भूमि होने की जानकारी सामने आई थी। इसके चलते उसे भी मौजूदा प्रस्ताव से बाहर कर दिया गया। इसके बावजूद इन दोनों स्थानों का नाम निवेश योजना से जोड़कर चर्चा की जा रही है, जबकि ये वर्तमान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं।
HMT और IDPL की जमीनों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट
HMT की भूमि के संबंध में बताया गया कि यह जमीन SIDCUL के पास है और संबंधित संस्था अपनी योजनाओं के अनुसार इस पर काम कर रही है। इसका UIIDB की मौजूदा निवेश प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
वहीं ऋषिकेश स्थित IDPL की भूमि को लेकर प्रमुख सचिव ने कहा कि संबंधित जमीन वन भूमि है और अभी तक राज्य सरकार के किसी विभाग को हस्तांतरित नहीं की गई है। ऐसे में इसे UIIDB की प्रस्तावित योजना का हिस्सा बताना सही नहीं है।
PWD रेस्ट हाउस पर किसी तरह की अंतिम मंजूरी नहीं
PWD के रेस्ट हाउस और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों को लेकर हो रही चर्चाओं पर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। प्रमुख सचिव के मुताबिक, जिन परिसंपत्तियों का उल्लेख किया जा रहा है, उनमें से कई के संबंध में न तो मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिली है और न ही UIIDB बोर्ड ने कोई अनुमोदन दिया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी संपत्ति को लेकर निर्णय स्वतः नहीं लिया जाता। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया, संबंधित विभागों की भूमिका और सक्षम स्तर पर आवश्यक अनुमोदन जरूरी होता है। इसलिए जिन परिसंपत्तियों को केवल चर्चाओं में प्रस्तावित बताया जा रहा है, उन्हें स्वीकृत योजना के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
स्थानीय कारोबार से लेकर किसानों तक पहुंच सकता है निवेश का लाभ
सरकार की इस पहल के पीछे एक बड़ा उद्देश्य पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन परियोजनाओं के विकसित होने से केवल होटल प्रबंधन और सेवा क्षेत्र में ही रोजगार नहीं बढ़ेगा, बल्कि कई अन्य व्यवसायों को भी नए अवसर मिल सकते हैं।
स्थानीय किसानों को फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए बाजार मिल सकता है। टैक्सी संचालकों, परिवहन व्यवसायियों, हस्तशिल्प कारीगरों, दुकानदारों, होमस्टे संचालकों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं की आय में भी वृद्धि की संभावनाएं बन सकती हैं। इस तरह एक निवेश परियोजना का सकारात्मक प्रभाव कई छोटे और मध्यम व्यवसायों तक पहुंच सकता है।
प्रशिक्षित युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार देने की कोशिश
प्रमुख सचिव ने युवाओं के रोजगार के मुद्दे को इस पूरी योजना का अहम हिस्सा बताया। उनका कहना है कि उत्तराखण्ड के अनेक युवा होटल मैनेजमेंट और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े संस्थानों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और व्यावसायिक कौशल भी है, लेकिन पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें रोजगार के लिए दूसरे राज्यों और विदेशों का रुख करना पड़ता है।
सरकार का मानना है कि यदि प्रदेश में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी से जुड़ी नई परियोजनाएं विकसित होती हैं, तो स्थानीय युवाओं को अपनी योग्यता के अनुरूप काम करने का अवसर मिल सकता है। इससे प्रतिभाशाली युवाओं का पलायन कम करने में भी मदद मिल सकती है और उनकी सेवाओं का लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था को प्राप्त होगा।
राजस्व से विकास कार्यों को मिलेगी मजबूती
सरकार के अनुसार निवेश और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से मिलने वाला राजस्व प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। GST और अन्य कर माध्यमों से प्राप्त होने वाली आय का इस्तेमाल सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
इससे राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत होने के साथ ही विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि उपलब्ध सरकारी संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग कर दीर्घकालिक आर्थिक लाभ हासिल किए जा सकते हैं।
तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए चर्चा
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने दोहराया कि UIIDB की पहल को लेकर वास्तविक प्रस्तावों और केवल चर्चाओं में शामिल संपत्तियों के बीच अंतर समझना जरूरी है। सरकार का दावा है कि फिलहाल कुछ सीमित भूमि पार्सल पर ही निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। अन्य स्थानों और परिसंपत्तियों को बिना आधिकारिक स्वीकृति के इस योजना से जोड़ना सही नहीं है।
कुल मिलाकर राज्य सरकार एसेट मॉनेटाइजेशन और PPP मॉडल को उत्तराखण्ड में निवेश, रोजगार तथा राजस्व वृद्धि के एक माध्यम के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है। हालांकि इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चयनित भूमि के उपयोग, निवेश की शर्तों, पर्यावरणीय पहलुओं और स्थानीय हितों को लेकर कितनी पारदर्शिता बरती जाती है। सरकार ने फिलहाल अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसका लक्ष्य प्रदेश के संसाधनों का उपयोग उत्तराखण्ड के नागरिकों, युवाओं और समग्र विकास के हित में करना है।

