7 august 2026 ; Dehradun।
उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित मतदाताओं को चुनाव संबंधी प्रक्रिया में राहत देने के लिए निर्वाचन विभाग ने महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की है। यदि किसी मतदाता का घर क्षतिग्रस्त हो गया है और उसके साथ आवश्यक दस्तावेज भी नष्ट हो गए हैं, तो केवल दस्तावेजों के अभाव में उसका नाम मतदाता सूची से हटाने जैसी कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में स्थानीय बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारी निर्णय लेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता सूची को अद्यतन करने का कार्य तेज़ी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और मतदाता सूची को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में जारी नोटिस प्रक्रिया के तहत अब तक लगभग 24.30 लाख मतदाताओं में से 20.27 लाख लोगों तक नोटिस पहुंचाए जा चुके हैं। वहीं, 14 जुलाई से 5 अगस्त के बीच दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इस अवधि में नए नाम जोड़ने के लिए हजारों आवेदन मिले, जबकि नाम हटाने और विवरण संशोधन से जुड़े आवेदन भी लगातार आ रहे हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मतदाता के दस्तावेज आपदा में नष्ट हो गए हैं, तो संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) स्थानीय बीएलओ से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर निर्णय लेंगे। इससे आपदा प्रभावित पात्र मतदाताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनका मतदान का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य त्रुटियों या विसंगतियों वाले मामलों का समाधान भी सरल प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है। साथ ही मतदाताओं से अपील की गई कि यदि उन्हें कोई नोटिस प्राप्त हुआ है तो समय पर उसका जवाब अवश्य दें, ताकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, राजनीतिक दलों के साथ भी इस अभियान को लेकर नियमित संवाद किया जा रहा है। विधानसभा, जिला और राज्य स्तर पर अधिकारियों की लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिससे पुनरीक्षण अभियान की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके। विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनावश्यक रूप से सूची से हटने से बचाना और निष्पक्ष एवं विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करना है।

