देहरादून ; 4 नवम्बर 2026,
देहरादून। दीपावली की तैयारियों के बीच उत्तराखंड के शहरों में एक ऐसी चुनौती सामने आने लगी है, जिसका असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। देहरादून और ऋषिकेश में हवा की गुणवत्ता को लेकर जारी ताजा निगरानी आंकड़े अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। त्योहार से पहले ही दोनों शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 का आंकड़ा पार कर चुका है। इससे आशंका जताई जा रही है कि यदि आने वाले दिनों में प्रदूषण का दबाव इसी तरह बना रहा तो दीपावली के बाद हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
एक नवंबर को दर्ज किए गए आंकड़ों में देहरादून और ऋषिकेश की हवा अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषित पाई गई, जबकि टिहरी में स्थिति बेहतर रही। यह अंतर बताता है कि प्रदेश के सभी शहरों में वायु गुणवत्ता एक जैसी नहीं है। शहरी इलाकों में बढ़ते प्रदूषण के बीच अब त्योहार के दौरान होने वाली आतिशबाजी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
त्योहारी गतिविधियों के बीच हवा की सेहत पर नजर
दीपावली के दौरान बाजारों में भीड़, वाहनों की आवाजाही और पटाखों का इस्तेमाल वातावरण पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसे में पहले से प्रभावित वायु गुणवत्ता वाले क्षेत्रों में लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। खासतौर पर सुबह और शाम के समय हवा में प्रदूषक कणों का प्रभाव स्वास्थ्य के लिहाज से परेशानी पैदा कर सकता है।
हवा में मौजूद बारीक कणों से बढ़ सकता है स्वास्थ्य जोखिम
प्रदूषण की चर्चा में पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर महत्वपूर्ण माना जाता है। ये बेहद छोटे कण सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इनकी अधिक मौजूदगी से सांस लेने में दिक्कत, खांसी और आंखों में जलन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। पहले से श्वसन संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियां ज्यादा मुश्किल पैदा कर सकती हैं।
बोर्ड ने शुरू की त्योहार से पहले प्रदूषण की पड़ताल
संभावित प्रदूषण के प्रभाव को समझने के लिए उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक नवंबर से विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की है। इसके तहत देहरादून के घंटाघर और नेहरू कॉलोनी सहित ऋषिकेश और टिहरी में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखी जा रही है। इन सभी स्थानों पर चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है।
इस पहल के जरिए त्योहार के आसपास वायु गुणवत्ता में आने वाले उतार-चढ़ाव का आकलन किया जा रहा है। तीसरे दिन जारी रिपोर्ट में एक नवंबर के आंकड़े सामने आए हैं, जिनमें देहरादून और ऋषिकेश की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत दिखाई देती है।
खुशियों के त्योहार में स्वच्छ हवा का भी रखें ध्यान
दीपावली को रोशनी और खुशियों का पर्व माना जाता है, लेकिन इसका उत्साह पर्यावरण पर भारी नहीं पड़ना चाहिए। अनावश्यक आतिशबाजी से बचना, कूड़ा या पत्तियां न जलाना और कम धुआं फैलाने वाले विकल्प अपनाना प्रदूषण का दबाव घटाने में मदद कर सकता है।
फिलहाल देहरादून और ऋषिकेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती त्योहार के दौरान हवा की गुणवत्ता को बिगड़ने से रोकने की है। अब निगरानी के आगामी आंकड़ों पर नजर रहेगी, जिनसे पता चलेगा कि दीपावली के आसपास प्रदूषण की स्थिति में कितना बदलाव आता है।

