24 july 2026 ; Dehradun!
हरिद्वार/कनखल। पंचदशनाम जूना अखाड़ा की ओर से कनखल स्थित हरिहर आश्रम में आयोजित एक धार्मिक एवं आध्यात्मिक समारोह के दौरान डॉ. उदिता त्यागी को ‘महामंडलेश्वर’ की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर वैदिक परंपराओं के अनुरूप संन्यास दीक्षा की सभी धार्मिक विधियां संपन्न कराई गईं। दीक्षा के बाद उन्हें नया संन्यासी नाम ‘महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरि’ प्रदान किया गया।
डॉ. उदिता त्यागी, महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि की शिष्या हैं। उपाधि प्रदान किए जाने के साथ ही उन्हें जूना अखाड़ा की संत परंपरा में एक नई आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी सौंपी गई। समारोह में बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, अखाड़े के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। पूरे आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और संन्यास परंपरा से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों का विधिवत आयोजन किया गया।
जूना अखाड़ा के संतों ने कहा कि सनातन परंपरा में महामंडलेश्वर की उपाधि केवल सम्मान का प्रतीक नहीं होती, बल्कि धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी इसके साथ जुड़ी होती है। इसी भावना के साथ डॉ. उदिता त्यागी को यह दायित्व सौंपा गया है।
समारोह के दौरान मौजूद संतों ने नव नियुक्त महामंडलेश्वर को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि वे सनातन धर्म की परंपराओं, आध्यात्मिक शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उपाधि ग्रहण करने के बाद उन्होंने भी धर्म सेवा, राष्ट्रहित और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
हरिहर आश्रम में आयोजित यह समारोह संत समाज और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां पारंपरिक धार्मिक गरिमा और वैदिक रीति-रिवाजों के बीच संन्यास दीक्षा एवं महामंडलेश्वर पद प्रदान करने की प्रक्रिया संपन्न हुई।

