देहरादून ; 2 नवम्बर 2026,
16 से 30 नवम्बर तक स्व-गणना, एक दिसम्बर से शुरू होगा घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने का काम
देहरादून। उत्तराखण्ड में जनगणना-2027 को लेकर नई राजपत्र अधिसूचना के बाद बनी असमंजस की स्थिति पर अब तस्वीर साफ हो गई है। राज्य में जनगणना की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार ही पूरी की जाएगी। निदेशक जनगणना कार्य इवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखण्ड के कार्यक्रम में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है और न ही जनगणना को आगे के लिए टाला गया है।
निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक प्रदेश में जनगणना का मैदानी कार्य 1 दिसम्बर 2026 से प्रारंभ होकर 4 जनवरी 2027 तक चलेगा। इस दौरान संबंधित कर्मचारी विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर घर-घर आवश्यक विवरण जुटाएंगे। जनगणना के इस चरण में नागरिकों से निर्धारित जानकारियां प्राप्त कर आंकड़ों को संकलित किया जाएगा।
इससे पहले लोगों को स्व-गणना का विकल्प दिया जाएगा। इसके लिए 16 नवम्बर से 30 नवम्बर 2026 तक की अवधि तय की गई है। इस व्यवस्था के तहत नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद तय कार्यक्रम के अनुसार जनगणना का मैदानी चरण संचालित होगा।
दरअसल, भारत के अन्य गैर-निर्वाचन राज्यों के लिए जारी नई राजपत्र अधिसूचना के बाद जनगणना की तारीखों को लेकर अलग-अलग तरह की खबरें सामने आई थीं। इनके चलते उत्तराखण्ड में भी कार्यक्रम बदलने अथवा स्थगित होने को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनने लगी थी।
इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए निदेशक जनगणना कार्य ने कहा है कि दूसरे राज्यों के लिए जारी अधिसूचना को उत्तराखण्ड की निर्धारित समय-सारिणी से जोड़कर देखना उचित नहीं है। प्रदेश के लिए पहले से तय कार्यक्रम प्रभावी है और उसी के अनुरूप सभी कार्यवाही की जाएगी।
इस स्पष्टीकरण के बाद उत्तराखण्ड में जनगणना की दोनों प्रमुख समय-सीमाएं स्पष्ट हो गई हैं। नागरिक 16 से 30 नवम्बर के बीच स्व-गणना कर सकेंगे, जबकि 1 दिसम्बर से 4 जनवरी तक जनगणना का मैदानी कार्य चलेगा। राज्य में निर्धारित कार्यक्रम के तहत ही पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

