देहरादून ; 3 नवम्बर 2026,
देहरादून। प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखण्ड में आपदा से निपटने की तैयारियों को व्यापक स्तर पर मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने प्रतिवर्ष 28 नवंबर को आपदा प्रबंधन दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी तंत्र से लेकर आम नागरिकों तक आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, राहत एवं बचाव कार्यों की क्षमता विकसित करना और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित व सुरक्षित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इस वर्ष 25 से 28 नवंबर तक प्रदेश के सभी जनपदों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और संबंधित संस्थानों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 28 नवंबर को राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन होगा, जबकि इससे पहले तीन दिनों तक जिला, तहसील, विकासखंड और संस्थागत स्तर पर प्रशिक्षण, अभ्यास तथा जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान की याद में चुनी गई तारीख
28 नवंबर को आपदा प्रबंधन दिवस के रूप में मनाने के पीछे वर्ष 2023 का सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान एक महत्वपूर्ण आधार है। उत्तरकाशी जिले में निर्माणाधीन सुरंग के भीतर फंसे 41 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया था। इसमें आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों की रणनीति और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल का उपयोग किया गया।
28 नवंबर 2023 को सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। इस अभियान ने आपदा की स्थिति में धैर्य, समन्वय, तकनीकी संसाधनों और सामूहिक प्रयासों की अहमियत को सामने रखा। इसी घटना की स्मृति को स्थायी रूप देने और राज्य में आपदा तैयारियों को निरंतर बेहतर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर साल इस तारीख को आपदा प्रबंधन दिवस मनाने की घोषणा की है।
सरकारी कार्यालयों में गठित होंगी सुरक्षा समितियां
मुख्य सचिव ने सभी सरकारी कार्यालयों, निगमों, निकायों और संस्थानों को अपने भवनों में मौजूद संभावित जोखिमों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रत्येक कार्यालय में विभागाध्यक्ष या कार्यालयाध्यक्ष की देखरेख में तीन से पांच सदस्यों की समिति बनाई जाएगी।
यह समिति आग लगने, बिजली से संबंधित दुर्घटनाओं, भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, पेड़ गिरने और भवनों को नुकसान पहुंचने जैसी परिस्थितियों का आकलन करेगी। साथ ही संबंधित खतरों से बचाव के लिए जरूरी उपाय भी सुझाएगी।
कार्यालयों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, उनकी वैधता और काम करने की स्थिति की जांच की जाएगी। प्रत्येक मंजिल पर अग्निशमन व्यवस्था, पानी की उपलब्धता और कर्मचारियों को आग बुझाने वाले उपकरणों के इस्तेमाल की जानकारी है या नहीं, इसका भी परीक्षण होगा।
जिलों में कई स्थानों पर एक साथ होगी मॉक ड्रिल
25 से 27 नवंबर के बीच प्रत्येक जिले में एक दिन कम से कम आठ से दस स्थानों पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इन अभ्यासों के लिए अस्पतालों, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों, बिजली परियोजनाओं, सुरंगों, बड़े संस्थानों और अधिक भीड़ वाले स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इन गतिविधियों के माध्यम से संबंधित संस्थानों की आपातकालीन तैयारियों को परखा जाएगा। कर्मचारियों और आम लोगों को यह समझाने का प्रयास होगा कि भूकंप, आग, बाढ़ या अन्य आपदा आने पर सुरक्षित स्थान तक कैसे पहुंचना है और राहत दलों के साथ किस तरह सहयोग करना है।
28 नवंबर को प्रत्येक जिला मुख्यालय में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। यहां बचाव कार्यों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, ताकि लोगों को उनकी उपयोगिता और संचालन के बारे में जानकारी मिल सके।
तहसील और गांवों तक पहुंचेगा जागरूकता अभियान
आपदा प्रबंधन दिवस की गतिविधियां केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रहेंगी। तहसील स्तर पर भी प्रशिक्षण, जागरूकता और मॉक ड्रिल आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन विभाग, आपदा मित्र, युवा आपदा मित्र, आपदा सखी, पूर्व सैनिक, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, भारत स्काउट एवं गाइड, स्वयं सहायता समूह और रेडक्रॉस से जुड़े लोगों को शामिल किया जाएगा।
प्रत्येक कार्यक्रम में कम से कम 50 से 100 प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा विकासखंड स्तर पर 25 से 27 नवंबर के बीच क्षेत्र पंचायत सदस्यों की बैठकें आयोजित होंगी। इनमें स्थानीय स्तर पर आपदा जोखिम कम करने और प्रभावित क्षेत्रों में तैयारी मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता रैलियां, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। स्थानीय स्वयंसेवकों को प्राथमिक उपचार तथा खोज एवं बचाव की बुनियादी तकनीकों का प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर रहेगा।
स्कूलों में विद्यार्थियों को सिखाए जाएंगे बचाव के तरीके
शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया है कि 25 से 27 नवंबर के बीच ऐसे विद्यालयों में एक दिवसीय मॉक ड्रिल कराई जाए, जहां विद्यार्थियों की संख्या 100 से अधिक है। इन अभ्यासों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन विभाग, सेना, आईटीबीपी, एसएसबी, रेडक्रॉस, एनसीसी और स्काउट एवं गाइड के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
28 नवंबर को विद्यालयों में आपदा प्रबंधन से संबंधित वाद-विवाद, निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण, स्लोगन और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इसका उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही आपदा के संभावित खतरों, सुरक्षा उपायों और सही प्रतिक्रिया के बारे में जागरूक करना है।
अस्पतालों की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं की होगी समीक्षा
स्वास्थ्य विभाग को सभी सरकारी और निजी अस्पतालों सहित स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण करने को कहा गया है। इसके तहत आग, शॉर्ट सर्किट, बाढ़, भूकंप और रासायनिक एवं जैविक आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन किया जाएगा।
अस्पतालों में सुरक्षित एकत्रीकरण स्थल, मरीजों और कर्मचारियों के लिए निकासी मार्ग तथा प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की समीक्षा होगी। विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि आपदा की स्थिति में मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम उपलब्ध हैं या नहीं।
पशुधन, जंगलों और बिजली परियोजनाओं की सुरक्षा पर भी जोर
आपदा के समय केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पशुधन, वन संपदा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग को पशुओं की सुरक्षित निकासी, अस्थायी आश्रय स्थलों और चारे के आपातकालीन भंडारण के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग वन कर्मचारियों, फायर वॉचरों और वन पंचायतों को जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने तथा आग पर नियंत्रण पाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देगा।
वहीं ऊर्जा विभाग को सभी पावर हाउस में संभावित आपदा और सुरक्षा संबंधी खतरों की पहचान कर आवश्यक इंतजाम करने को कहा गया है। प्रत्येक पावर हाउस में 28 नवंबर को मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिससे आपातकालीन स्थिति में कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और उपलब्ध संसाधनों की उपयोगिता का परीक्षण किया जा सके।
अग्निशमन विभाग करेगा बड़े प्रतिष्ठानों का सुरक्षा ऑडिट
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और अग्निशमन विभाग जिला प्रशासन के साथ मिलकर जनजागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे। इनमें बचाव उपकरणों के इस्तेमाल की जानकारी देने के साथ पहले किए गए रेस्क्यू अभियानों के फोटो और वीडियो भी दिखाए जाएंगे।
अग्निशमन विभाग को बड़े प्रतिष्ठानों का सुरक्षा ऑडिट करने, निर्धारित मानकों के अनुसार अग्नि सुरक्षा इंतजामों की जांच करने और विभाग के पास उपलब्ध बचाव उपकरणों की संख्या एवं कार्यशीलता का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
आपदा से पहले तैयारी को बनाया जाएगा प्राथमिकता
प्रदेश में पहली बार इस तरह प्रतिवर्ष एक निर्धारित तिथि पर आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने के साथ-साथ आपदा से पहले जोखिम पहचानने, सुरक्षा व्यवस्था सुधारने और स्थानीय समुदाय को सक्षम बनाने पर ध्यान देना है।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रमों को निर्धारित समय पर पूरा कराने की प्रक्रिया चल रही है।
इस पहल के तहत सरकारी संस्थानों की सुरक्षा जांच, स्कूलों में अभ्यास, अस्पतालों की तैयारियों का परीक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण एक व्यापक अभियान का हिस्सा होंगे। आने वाले समय में इसका उद्देश्य उत्तराखण्ड में ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जहां आपदा की आशंका सामने आते ही प्रशासन के साथ स्थानीय लोग भी जागरूकता, प्रशिक्षण और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर सुरक्षित प्रतिक्रिया दे सकें।

