देहरादून ; 12.09.2026।
देहरादून। उत्तराखंड में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं के लगातार बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर तेजी से काम कर रही है। चारधाम यात्रा हो या प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं तीर्थ स्थल, बढ़ती वाहन संख्या के कारण सामने आने वाली पार्किंग की समस्या को दूर करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों के बाद आवास विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों में पार्किंग सुविधाओं को विस्तार देने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया है। पिछले चार वर्षों में विभाग की ओर से 63 पार्किंग परियोजनाओं को पूरा किया गया है, जिनमें कुल 4202 वाहनों के लिए पार्किंग क्षमता विकसित हुई है। इन परियोजनाओं का असर पर्वतीय शहरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के रूप में दिखाई दे रहा है।
धामी सरकार ने पहाड़ों की जरूरत के हिसाब से बदला पार्किंग का मॉडल
पर्वतीय क्षेत्रों में जमीन की कमी और भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी इलाकों से अलग हैं। मुख्यमंत्री धामी की पहल पर इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध जमीन और जरूरत के मुताबिक पार्किंग के विभिन्न मॉडल अपनाए जा रहे हैं।
कहीं सरफेस पार्किंग, तो कहीं बहुमंजिला पार्किंग तैयार की जा रही है। इसके अलावा सीमित जगह में अधिक वाहनों को समायोजित करने के लिए ऑटोमेटेड पार्किंग जैसी आधुनिक व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों की सड़कों को अनावश्यक वाहन दबाव से मुक्त करना है।
नैनीताल में धामी सरकार की बड़ी पहल, 700 वाहनों की क्षमता
पर्यटन के लिहाज से उत्तराखंड की पहचान माने जाने वाले नैनीताल में पार्किंग की समस्या को कम करने के लिए भी मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में कदम उठाए गए हैं। मेट्रोपोल होटल परिसर क्षेत्र में पार्किंग का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां करीब 700 वाहनों को एक साथ खड़ा करने की सुविधा उपलब्ध होगी।
पर्यटन सीजन में नैनीताल में वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण कई बार यातायात व्यवस्था पर दबाव देखने को मिलता है। ऐसे में नई पार्किंग सुविधा शहर में वाहनों को व्यवस्थित करने और सड़क किनारे होने वाली पार्किंग को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कैंची धाम में श्रद्धालुओं के लिए भी बढ़ रही सुविधा
मुख्यमंत्री धामी की सरकार ने धार्मिक पर्यटन से जुड़े प्रमुख स्थलों पर भी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया है। इसी क्रम में कैंची धाम में बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण कराया जा रहा है।
इस पार्किंग में एक समय में 500 से अधिक वाहनों को खड़ा किया जा सकेगा। कैंची धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह परियोजना यातायात प्रबंधन के लिहाज से अहम मानी जा रही है। पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था होने से श्रद्धालुओं को वाहन खड़ा करने में सहूलियत मिलेगी और मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
चारधाम यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में अहम कड़ी
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर भी देशभर से पर्यटक आते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जोर ऐसे समय में केवल यात्रा मार्गों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुविधा से जुड़ी सहायक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर भी है।
पार्किंग परियोजनाओं को इसी प्रयास की अहम कड़ी माना जा रहा है। पर्याप्त पार्किंग उपलब्ध होने से सड़क किनारे वाहनों की भीड़ घटेगी और यातायात को नियंत्रित करने में प्रशासन को सुविधा मिलेगी।
स्थानीय लोगों को भी मिल रही राहत
पार्किंग सुविधाओं के विस्तार का सीधा लाभ स्थानीय नागरिकों को भी मिल रहा है। पर्यटक और श्रद्धालुओं के वाहन यदि निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़े होंगे तो बाजारों और मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति कम होगी। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बेहतर वातावरण मिल सकता है।
आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में पार्किंग सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। उनके अनुसार 63 पार्किंग परियोजनाओं के पूरा होने से पर्वतीय जनपदों में पार्किंग की समस्या काफी हद तक कम हुई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन और धार्मिक आवागमन के साथ सुविधाओं का विस्तार भी उसी गति से हो। पार्किंग नेटवर्क का विस्तार इसी दिशा में उठाया गया कदम है, जिससे प्रदेश के पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर आने वाले लोगों के साथ-साथ स्थानीय आबादी को भी अधिक सुगम और व्यवस्थित आवागमन की सुविधा मिल सके।

