23 july 2026 ; Dehradun!
25 जुलाई, शनिवार को पूरे देश में देवशयनी एकादशी श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। इसे हरिशयनी एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है, जो आध्यात्मिक साधना, संयम, सेवा और भक्ति का विशेष काल माना जाता है।
भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व
सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनकर्ता कहा गया है। मान्यता है कि जब भगवान योगनिद्रा में जाते हैं, तब भी वे समस्त सृष्टि का संचालन अपनी दिव्य शक्ति से करते रहते हैं। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने, व्रत रखने, विष्णु सहस्रनाम, गीता और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु इस दिन पीले पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत और सात्विक भोग अर्पित कर भगवान की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
चातुर्मास का आध्यात्मिक संदेश
देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर चातुर्मास चार महीनों तक चलता है और इसका समापन देवउठनी एकादशी पर होता है। इस अवधि में विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। इसके बजाय जप, तप, दान, व्रत, सत्संग और धर्मग्रंथों के अध्ययन को विशेष महत्व दिया जाता है। संत-महात्मा भी इस समय एक स्थान पर रहकर प्रवचन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं।
व्रत और पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी का व्रत करने से पापों का क्षय होता है और मन को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। भक्त प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करते हैं, दीप प्रज्वलित करते हैं, तुलसी अर्पित करते हैं तथा दिनभर भजन-कीर्तन और भगवान के स्मरण में समय व्यतीत करते हैं। शाम के समय आरती और कथा श्रवण का भी विशेष महत्व माना गया है।
श्रद्धा, संयम और भक्ति का पर्व
देवशयनी एकादशी केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, अनुशासन और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देने वाला पावन पर्व है। यह दिन भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने, अपने जीवन में सदाचार अपनाने और सेवा, दया तथा संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई श्रीहरि की आराधना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।

