15 August 2026 ; Dehradun।
चमोली। पीपलकोटी विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना में बृहस्पतिवार शाम हुआ हादसा वहां काम कर रहे श्रमिकों के लिए जिंदगी और मौत के बीच का पल बन गया। घटनास्थल के आसपास मौजूद श्रमिकों के मुताबिक, हादसे से पहले माहौल अचानक बदलने लगा था। कुछ ही देर में तेज हवा के कई झटके आए और इसके बाद भारी मलबा व गाद तेजी से टनल की ओर बढ़ गई।
श्रमिकों ने बताया कि शुरुआत में हवा का एक तेज झोंका आया। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही क्षण बाद इतनी बड़ी घटना होने वाली है। इसके बाद दूसरी बार हवा का दबाव अचानक बढ़ा। टनल के अंदर धूल और गाद इतनी फैल गई कि सामने का दृश्य साफ दिखाई देना मुश्किल हो गया। श्रमिक अभी स्थिति को समझ ही रहे थे कि तीसरे झोंके के साथ मलबे का तेज बहाव उनकी ओर आ गया।
अचानक सामने आए मलबे से बचने के लिए श्रमिकों ने बाहर की तरफ दौड़ लगाई। इसी दौरान झारखंड के खूंटी जिले के तपरा गांव निवासी 27 वर्षीय हारबिल गुड़िया इसकी चपेट में आ गए। बहाव की ताकत इतनी अधिक थी कि वह मलबे के साथ ही आगे की ओर खिंचते चले गए। बाद में उन्हें गंभीर हालत में बाहर निकाला गया। उनके पैर में फ्रैक्चर हुआ है और शरीर के दूसरे हिस्सों में भी चोटें आई हैं।
हादसे के वक्त उनके साथ मौजूद ओडिशा निवासी जागेश्वर ने बताया कि वह टनल के अपेक्षाकृत बाहरी हिस्से में थे। मलबा आते ही उन्होंने तुरंत वहां से हटने की कोशिश की और बाहर निकलने में सफल रहे। उनके मुताबिक, सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को सोचने या एक-दूसरे को संभालने तक का समय नहीं मिला।
श्रमिकों का कहना है कि टनल में पहले से मौजूद सरिया और दूसरी निर्माण सामग्री भी उनके लिए बड़ा खतरा बन सकती थी। बहाव के दौरान यदि कोई श्रमिक किनारे की तरफ जा गिरता तो इन सामानों से टकराकर उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती थी। हारबिल बीच की दिशा में बहते हुए बाहर की ओर आए, जिससे एक बड़े खतरे से बचाव हुआ।
हादसे में घायल खूंटी जिले के 24 वर्षीय निस्तर भिंगरा की कहानी भी कम डरावनी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह घटनास्थल से कुछ दूरी पर काम कर रहे थे। अचानक तेज बहाव उनकी ओर आया और देखते ही देखते वह भी उसकी चपेट में आ गए। बचने के लिए उन्होंने पास लगे एक पाइप को कसकर पकड़ लिया। बहाव कम होने तक वह उसी के सहारे टिके रहे। बाद में घायल अवस्था में बाहर निकले और अस्पताल पहुंचाए गए।
इस हादसे में सबसे भयावह बात यह रही कि श्रमिकों को खतरे का अंदाजा लगाने और सुरक्षित जगह तक पहुंचने के लिए बहुत कम समय मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज हवा के झटकों के बाद मलबे का दबाव अचानक बढ़ा और कुछ ही पलों में टनल का एक हिस्सा मलबे व गाद के बहाव से भर गया।
घटना के बाद घायल श्रमिक अस्पताल में उपचार करा रहे हैं, जबकि उनके साथी उनकी देखरेख में जुटे हैं। हादसे से बचे श्रमिकों के बयानों से घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके लिए वह कुछ सेकंड का घटनाक्रम अब जिंदगी भर याद रहने वाला खौफनाक अनुभव बन गया है।

