26 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर रायपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पार्टी के कई नेता टिकट की दौड़ में सक्रिय नजर आ रहे हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में लगातार हार झेलने के बाद कांग्रेस इस बार ऐसे उम्मीदवार की तलाश में है, जो पार्टी को जीत दिलाने की क्षमता रखता हो।
रायपुर विधानसभा सीट का गठन परिसीमन के बाद वर्ष 2012 में हुआ था। इससे पहले यह क्षेत्र डोईवाला विधानसभा का हिस्सा था। वर्ष 2007 में डोईवाला सीट से भाजपा के त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जीत दर्ज की थी। वहीं 2012 में नई बनी रायपुर सीट पर कांग्रेस के उमेश शर्मा काऊ ने पार्टी को जीत दिलाई। हालांकि उनके पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस इस सीट पर दोबारा जीत हासिल नहीं कर सकी।
इसके बाद हुए 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने लगातार जीत दर्ज की और पार्टी के उम्मीदवार ने तीसरी बार विधायक बनने का रिकॉर्ड कायम किया। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हीरा सिंह बिष्ट को भी हार का सामना करना पड़ा, जबकि भाजपा के दिग्गज नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस सीट से चुनावी मुकाबले का हिस्सा रह चुके हैं।
अब 2027 के चुनाव को देखते हुए कांग्रेस में टिकट की दावेदारी तेज हो गई है। सूरज नेगी, विनीत प्रसाद भट्ट, प्रवीण त्यागी, हेमा पुरोहित, महेंद्र सिंह नेगी समेत कई नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। सभी नेता संगठन और जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाकर टिकट की दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस बार केवल राजनीतिक समीकरण नहीं, बल्कि जीत की संभावना को सबसे बड़ा आधार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के हाथ में होगा। टिकट वितरण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि रायपुर में कांग्रेस किस चेहरे पर भरोसा जताती है।
रायपुर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला केवल टिकट की दावेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के लिए अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की चुनौती भी है। ऐसे में उम्मीदवार का चयन आगामी चुनाव में पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

