देहरादून ; 25 अगस्त 2026।
देहरादून। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्सवों और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में सरकार ने नई पहल को गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल और स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर जिले की अपनी विशिष्ट पहचान को एक व्यवस्थित योजना के तहत बड़े मंच पर प्रस्तुत किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद अपने यहां होने वाले किसी खास पर्व, मेले या सांस्कृतिक आयोजन को चिन्हित कर उसे वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल के रूप में विकसित करे। इसके लिए जिलों को पूरे वर्ष का कार्यक्रम कैलेंडर तैयार करना होगा, जिससे आयोजन की तैयारी समय रहते की जा सके और पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी बढ़े।
उन्होंने कहा कि केवल सरकारी स्तर पर आयोजन करने के बजाय स्थानीय कलाकारों, कारीगरों, उद्यमियों, व्यापारियों, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों और अन्य स्टेकहोल्डर्स को इससे जोड़ा जाए। साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों और नॉन-रेजिडेंट उत्तराखण्डियों को भी इन आयोजनों से जोड़कर राज्य की सांस्कृतिक विरासत तथा स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
पारंपरिक मेलों को मिलेगा नया स्वरूप
बैठक में उत्तराखंड के विशिष्ट आयोजनों को बड़े स्तर पर विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। चमोली के रम्माण मेले को व्यापक पहचान दिलाने के साथ ही उत्तरकाशी के अनूठे बटर फेस्टिवल जैसे आयोजनों को अधिक व्यवस्थित और आकर्षक रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
इसी क्रम में पौड़ी और चमोली के शरदोत्सव, हरिद्वार महोत्सव, नैनीताल विंटर कार्निवल तथा मसूरी विंटर कार्निवल को बेहतर प्रबंधन और नए आकर्षणों के साथ आयोजित करने की बात कही गई। चम्पावत में होने वाले इंटरनेशनल एंगलिंग मीट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और खेल गतिविधियों के बड़े मंच के रूप में विकसित करने तथा उत्तरायणी मेले में एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा निर्यात का बाजार
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना भी रहा। मुख्य सचिव ने जिलावार निर्यात की संभावनाओं की समीक्षा करते हुए प्रत्येक जनपद के लिए बेसलाइन डेटा तैयार करने को कहा। इस डेटा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस जिले के कौन से उत्पादों में निर्यात की अधिक संभावना है और उन्हें बाजार की जरूरत के अनुरूप किस तरह तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने स्थानीय उत्पादों की पहचान से लेकर उनकी प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि किसी उत्पाद की बाजार में पहचान बनाने के लिए केवल उत्पादन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी ब्रांडिंग पर भी समान रूप से काम करना जरूरी है।
निर्यात संवर्धन के लिए बनेगी स्थायी व्यवस्था
निर्यात से जुड़े प्रयासों को लगातार आगे बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में स्थायी समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति में सचिव उद्योग, वन, आयुष समेत अन्य संबंधित विभागों और हितधारकों को शामिल किया जाएगा। यह व्यवस्था जिलों की जरूरतों के अनुसार निर्यात संबंधी योजनाओं में समन्वय स्थापित करने में मदद करेगी।
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि किसी एक जिले में सफल हुई पहल को दूसरे जिलों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए जिलों के बीच सफल प्रयोगों, नवाचारों और अनुभवों का नियमित आदान-प्रदान किया जाना चाहिए। इससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद स्थानीय प्रतिभा, उत्पाद और सांस्कृतिक विरासत को एक-दूसरे की सफल योजनाओं से लाभ मिल सकेगा।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक आयोजनों को केवल स्थानीय उत्सवों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें पर्यटन, संस्कृति, रोजगार और निर्यात से जोड़ते हुए आर्थिक गतिविधियों का माध्यम बनाना है। इससे स्थानीय उत्पादकों, कारीगरों और छोटे उद्यमों को नए बाजार मिलने के साथ राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।

