देहरादून ; 1 नवम्बर 2026,
देहरादून। चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं को हवाई यात्रा से जुड़ा बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा नियमों में बदलाव और परिचालन खर्च बढ़ने के चलते हेली कंपनियों ने शेष यात्रा सत्र के लिए चार्टर्ड हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद करने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद चारधाम के लिए पहले से कराई गई चार्टर्ड उड़ानों की बुकिंग भी निरस्त कर दी गई हैं। हालांकि, केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को फिलहाल राहत रहेगी, क्योंकि वहां संचालित नियमित शटल हेलीकॉप्टर सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहे एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर नए कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने चारधाम क्षेत्र में संचालित चार्टर्ड हेलीकॉप्टर उड़ानों के नियमों को और कड़ा कर दिया है। नए निर्देश के तहत दो नवंबर से सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर की प्रत्येक चार्टर्ड उड़ान में दो पायलटों की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है।
इस बदलाव को लेकर हेली ऑपरेटरों ने अपनी असमर्थता जताई है। कंपनियों का तर्क है कि मौजूदा किराया व्यवस्था में दो पायलटों के साथ चार्टर्ड उड़ानों का संचालन करना आर्थिक रूप से मुश्किल होगा। अतिरिक्त पायलट की व्यवस्था करने से संचालन का खर्च बढ़ेगा, जबकि टिकटों की वर्तमान दरों में इतनी बढ़ोतरी संभव नहीं है। इसी वजह से कंपनियों ने यात्रा के बचे हुए दिनों में चार्टर्ड सेवाएं संचालित नहीं करने का निर्णय लिया है।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि 10 नवंबर तक चलने वाले शेष यात्रा सत्र में चार्टर्ड हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध नहीं रहेंगी। संबंधित कंपनियों ने अपनी ओर से बुकिंग रद्द किए जाने की जानकारी प्राधिकरण को दे दी है। इससे उन यात्रियों को अपनी यात्रा योजना में बदलाव करना पड़ सकता है, जिन्होंने चारधाम दर्शन के लिए पहले से चार्टर्ड हेलीकॉप्टर की सुविधा ली थी।
उड़ान संचालन से पहले लेनी होगी अनिवार्य अनुमति
डीजीसीए ने केवल पायलटों की संख्या बढ़ाने तक ही सुरक्षा उपाय सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि हेलीकॉप्टरों की आवाजाही पर निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है। अब प्रत्येक उड़ान के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए यूकाडा के हेली ऑपरेशन अधिकारी (एचओओ) से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, उड़ान शुरू करने से पहले सहस्रधारा या सोनप्रयाग हेलीपैड पर तैनात अधिकारी से संबंधित गंतव्य तक जाने की मंजूरी प्राप्त करनी होगी। हेलीकॉप्टर के गंतव्य पर उतरने के बाद उसकी लैंडिंग से संबंधित लिखित रिपोर्ट कंट्रोल रूम को भेजनी होगी। इस रिपोर्ट की जांच और आवश्यक जानकारी मिलने के बाद ही अगली उड़ान के लिए अनुमति दी जाएगी।
पायलटों की व्यवस्था के लिए कंपनियों को मिली छूट
नए नियमों के पालन में कंपनियों को कुछ व्यावहारिक राहत भी दी गई है। ऑपरेटर आपसी तालमेल के माध्यम से दूसरे पायलट की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं। इसके अलावा 60 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे योग्य और निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले पायलटों को भी सह-पायलट के रूप में तैनात करने की अनुमति दी गई है।
नियमित शटल सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर
चार्टर्ड हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद होने के बावजूद केदारनाथ धाम के लिए नियमित शटल संचालन जारी रहेगा। ऐसे में शटल सेवा के माध्यम से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को फिलहाल परेशानी नहीं होगी। दूसरी ओर, चारधाम के लिए निजी चार्टर्ड उड़ानों पर निर्भर यात्रियों को अपनी यात्रा की नई व्यवस्था करनी होगी।
सुरक्षा नियमों में किए गए बदलावों का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, मौसम में तेजी से होने वाले बदलाव और ऊंचाई वाले हेलीपैड पर उड़ानों के जोखिम को देखते हुए निगरानी प्रक्रिया को सख्त किया गया है। अब यात्रा के शेष दिनों में हवाई सेवाओं का संचालन नए सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप ही किया जाएगा।

