4 june 2026
नई दिल्ली: देश के सबसे आधुनिक हाईवे में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अब तेज गति से अचानक लेन बदलने वाले वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एक्सप्रेसवे पर लगे हाईटेक कैमरों और निगरानी प्रणाली को अपग्रेड किया गया है, जिससे खतरनाक तरीके से लेन बदलने वाले वाहनों की पहचान कर सीधे चालान जारी किए जा सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, राजस्थान से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे के हिस्से में कैमरों के सॉफ्टवेयर को अपडेट कर दिया गया है। यह तकनीक अब वाहनों की गति के साथ-साथ उनके लेन अनुशासन पर भी नजर रखेगी। यदि कोई चालक तेज रफ्तार में अचानक एक लेन से दूसरी लेन में प्रवेश करता है और इससे दुर्घटना की आशंका बनती है, तो सिस्टम स्वतः उल्लंघन दर्ज कर सकता है।
हादसों पर लगाम लगाने की तैयारी
अधिकारियों का मानना है कि एक्सप्रेसवे पर होने वाली कई दुर्घटनाओं के पीछे अचानक लेन बदलना एक बड़ी वजह है। खासकर 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर चल रहे वाहनों के बीच अचानक कट मारना गंभीर हादसों का कारण बन सकता है। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य चालकों को अनुशासित ड्राइविंग के लिए प्रेरित करना और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है।
हरियाणा में भी जल्द लागू होगी व्यवस्था
राजस्थान में तकनीकी व्यवस्था शुरू होने के बाद अब हरियाणा के हिस्से में भी इसी तरह की निगरानी प्रणाली लागू करने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षण प्रक्रिया पूरी होते ही वहां भी कैमरे लेन उल्लंघन की निगरानी शुरू कर देंगे।
चालकों को क्या रखना होगा ध्यान?
लेन बदलने से पहले इंडिकेटर का उपयोग करें।
अचानक कट मारने या तेज मोड़ लेने से बचें।
निर्धारित गति सीमा का पालन करें।
ओवरटेक करने के बाद सुरक्षित दूरी बनाकर ही लेन बदलें।
कैमरों और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली को ध्यान में रखते हुए नियमों का पालन करें।
सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे पर केवल गति नियंत्रण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लेन अनुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में नई तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और यात्रियों की जान बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। आने वाले समय में यदि यह प्रणाली सफल रहती है तो देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे पर भी इसे लागू किया जा सकता है।

