15 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। राज्य आंदोलनकारियों से जुड़े वर्षों पुराने लंबित मामलों के समाधान की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल का संकेत दिया है। शासन स्तर पर हुई बैठक में आंदोलनकारियों के विभिन्न मुद्दों के निस्तारण के लिए कैबिनेट की एक उप-समिति गठित करने पर सहमति बनी है। यह समिति आंदोलनकारियों, शासन और सरकार के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के माध्यम से समस्याओं का समाधान तलाशेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा, जिससे लंबित मामलों पर जल्द निर्णय लिया जा सके।
राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल ने बताया कि गृह सचिव शैलेश बगोली के साथ हुई बैठक में आंदोलनकारियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान गृह सचिव ने आश्वासन दिया कि इन मामलों के प्रभावी समाधान के लिए कैबिनेट की उप-समिति बनाई जाएगी। परिषद का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया तेज होगी।
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा विभिन्न जिलों में अभी तक राज्य आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण पूरा न होने का रहा। इसके अलावा राज्य आंदोलनकारियों को मिलने वाले 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ सभी पात्र लोगों तक नहीं पहुंचने का विषय भी गंभीरता से उठाया गया। आंदोलनकारियों ने मांग की कि आरक्षण का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी पात्र व्यक्तियों को सुनिश्चित किया जाए।
वर्ष 2011-12 में विभिन्न चयन प्रक्रियाओं में सफल होने के बावजूद कई राज्य आंदोलनकारियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिलने का मामला भी बैठक में प्रमुखता से रखा गया। परिषद ने कहा कि लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के साथ न्याय किया जाना आवश्यक है।
इसके साथ ही कैबिनेट के पूर्व आदेशों में अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अलावा अन्य भर्ती संस्थाओं को शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। आंदोलनकारियों ने मांग की कि सभी संबंधित भर्ती संस्थानों को आदेश के दायरे में लाया जाए ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को लाभ से वंचित न रहना पड़े।
बैठक के दौरान आंदोलनकारियों ने भर्ती प्रक्रियाओं में आयु सीमा बढ़ाने की मांग के साथ-साथ प्रस्तावित समिति को पर्याप्त अधिकार देने पर भी जोर दिया, ताकि उसके स्तर पर लिए गए निर्णय प्रभावी रूप से लागू हो सकें।
बैठक में वन्य जीव प्रतिपालक राजीव तलवार, ललित जोशी, प्रदीप कुकरेती, अंबुज शर्मा, संतन सिंह रावत, पीसी जोशी सहित अन्य प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। अब आंदोलनकारियों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि कैबिनेट उप-समिति का गठन शीघ्र होता है और उसकी सिफारिशों पर समयबद्ध निर्णय लिया जाता है, तो लंबे समय से लंबित कई मामलों के समाधान की उम्मीद मजबूत हो सकती है।

