18.08.2026 ; देहरादून।
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा ने संगठन को और मजबूत करने के साथ ही आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी को लेकर समीक्षा का दौर तेज कर दिया है। इसी क्रम में आज भाजपा प्रदेश मुख्यालय में टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार लोकसभा क्षेत्रों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हो रही है। बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की अध्यक्षता में तीनों संसदीय क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से मंथन किया जा रहा है।
बैठक में संबंधित लोकसभा क्षेत्रों के सांसदों और विधायकों के साथ संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद हैं। टिहरी लोकसभा क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधियों के अलावा उत्तरकाशी और देहरादून के जिला अध्यक्ष भी बैठक में शामिल हुए हैं। पार्टी नेतृत्व की ओर से क्षेत्रवार फीडबैक लेने के साथ संगठन की सक्रियता, जनप्रतिनिधियों के कामकाज और स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे मुद्दों की जानकारी जुटाई जा रही है।
लोकसभा क्षेत्रवार होगी संगठन की समीक्षा
भाजपा की इस बैठक का मुख्य फोकस तीनों लोकसभा क्षेत्रों में संगठन की स्थिति को समझना है। पार्टी यह जानने का प्रयास कर रही है कि बूथ से लेकर मंडल और जिला स्तर तक संगठन कितना सक्रिय है और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की स्थिति कैसी है। इसके साथ ही सांसदों और विधायकों से उनके-अपने क्षेत्रों में जनता के बीच चल रही गतिविधियों तथा लोगों की प्राथमिकताओं को लेकर भी फीडबैक लिया जा रहा है।
बैठक में क्षेत्रीय मुद्दों को भी प्रमुखता दिए जाने की बात सामने आ रही है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की अलग-अलग समस्याओं, विकास कार्यों, सड़क, रोजगार, पर्यटन, शिक्षा और अन्य स्थानीय विषयों पर जनप्रतिनिधियों से जानकारी ली जा सकती है। पार्टी नेतृत्व इन मुद्दों के आधार पर आने वाले समय की प्राथमिकताएं तय करने की तैयारी में है।
विधायकों के रिपोर्ट कार्ड पर भी नजर
बैठक का एक अहम पहलू विधायकों के कामकाज की समीक्षा भी माना जा रहा है। पार्टी संगठन की ओर से समय-समय पर जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और जनता के बीच उनकी पहुंच का आकलन किया जाता रहा है। ऐसे में तीनों लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों को लेकर विधायकों से जुड़े फीडबैक पर भी चर्चा होने की संभावना है।
इस दौरान यह भी देखा जा सकता है कि विधायक अपने क्षेत्र में जनता की समस्याओं को किस स्तर तक उठा रहे हैं, विकास योजनाओं की प्रगति कैसी है और संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ उनका तालमेल कितना प्रभावी है। हालांकि बैठक में किन-किन बिंदुओं पर अंतिम निर्णय लिया जाता है, इसकी तस्वीर बैठक पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
धामी बोले- लगातार हो रही हैं ऐसी बैठकें
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक के संबंध में कहा कि भाजपा की ओर से लगातार अलग-अलग स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, ब्लॉक प्रमुख, दायित्वधारी कार्यकर्ताओं, मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों के साथ भी बैठकें की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक इन बैठकों का उद्देश्य संगठन और जनप्रतिनिधियों से सीधे फीडबैक लेना है, ताकि क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा सके। उनका कहना है कि सरकार और संगठन के स्तर पर किए जा रहे कार्यों को जनता की प्राथमिकताओं से जोड़ना जरूरी है।
कुमाऊं के बाद अब गढ़वाल पर फोकस
भाजपा ने संसदीय क्षेत्रों के हिसाब से समीक्षा बैठकों का सिलसिला आगे बढ़ाया है। कुमाऊं मंडल में संबंधित लोकसभा क्षेत्रों के सांसदों और विधायकों के साथ बैठकें किए जाने के बाद अब गढ़वाल क्षेत्र की सीटों पर चर्चा की जा रही है। टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार लोकसभा क्षेत्रों की बैठक इसी व्यापक समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है।
पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाले फीडबैक को एक साथ जोड़कर संगठन की कमियों को दूर किया जाए और मजबूत पक्षों को और प्रभावी बनाया जाए। इसके साथ ही आने वाले समय में किन क्षेत्रों में ज्यादा सक्रियता की जरूरत है, किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और कार्यकर्ताओं को किस तरह जिम्मेदारियां दी जाएं, इस पर भी मंथन किया जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों और संगठन के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
भाजपा की इस कवायद में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल को भी अहम माना जा रहा है। पार्टी चाहती है कि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और जनता के साथ लगातार संपर्क में रहें। बैठक में मिले फीडबैक के आधार पर संगठनात्मक स्तर पर आवश्यक बदलाव और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा सकती है।
फिलहाल भाजपा मुख्यालय में चल रही यह बैठक टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार लोकसभा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक से निकलने वाले फीडबैक और संभावित फैसलों पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ राजनीतिक हलकों की भी नजर बनी हुई है।

