16 july 2026 ; Dehradun!
देहरादून। उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से विद्यालयी शिक्षा परिषद ने अहम निर्णय लिया है। अब विज्ञान और गणित जैसे विषयों का अध्ययन करने वाले विद्यार्थी भी हिंदी विषय के अनिवार्य संस्कृत खंड के माध्यम से संस्कृत का व्यवस्थित अध्ययन करेंगे। परिषद ने कक्षा 12 के लिए ‘निर्झरा-2’ पाठ्यपुस्तक को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया है, जिसके आधार पर वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षा में प्रश्न पूछे जाएंगे।
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सचिव विनोद कुमार ढौंडियाल ने इस संबंध में राज्य के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों के सभी इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को नई व्यवस्था की जानकारी दें और यह सुनिश्चित करें कि वर्तमान शैक्षिक सत्र से विद्यार्थियों को निर्धारित पुस्तक के अनुसार ही पढ़ाया जाए।
परिषद के अनुसार, एससीईआरटी, देहरादून ने इंटरमीडिएट स्तर पर हिंदी भाषा और कृषि हिंदी विषय के अनिवार्य संस्कृत भाग के लिए ‘निर्झरा-1’ और ‘निर्झरा-2’ नाम से दो पाठ्यपुस्तकें तैयार की हैं। इनमें से निर्झरा-1 को वर्ष 2025-26 से कक्षा 11 में लागू किया जा चुका है, जबकि अब कक्षा 12 के लिए निर्झरा-2 को लागू किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत वर्ष 2027 की इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में हिंदी भाषा के प्रश्नपत्र के अनिवार्य संस्कृत खंड से जुड़े सभी प्रश्न निर्झरा-2 पर आधारित होंगे। वहीं, कृषि हिंदी विषय के विद्यार्थियों के लिए संस्कृत खंड के प्रश्न निर्झरा-1 और निर्झरा-2 दोनों पुस्तकों से पूछे जाएंगे।
परिषद ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि नई पाठ्यपुस्तक के अनुरूप समय पर पठन-पाठन शुरू किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह कदम संस्कृत भाषा के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से उन्हें और अधिक जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

